काल सर्प दोष
यह क्या है
वह विन्यास जिसमें सभी शास्त्रीय ग्रह राहु–केतु अक्ष के एक ही ओर स्थित होते हैं — इसे कर्म-विषयक, तीव्र की गई जीवन-धारा के रूप में पढ़ा जाता है।
निर्माण-नियम
सातों ग्रह (सूर्य से शनि तक) राशिचक्र के उस आधे भाग में पड़ते हैं जो राहु से केतु तक फैला है (या सभी दूसरे आधे भाग में)।
हमारा इंजन क्या जाँचता है
एक देशांतरीय चाप परीक्षण: प्रत्येक ग्रह की राहु से कोणीय दूरी की गणना की जाती है और दोष तभी दर्शाया जाता है जब सातों चाप एक ही ओर हों (≤180° या ≥180°)।
तीव्रता आकलन
उपस्थित होने पर मध्यम; अन्यथा कोई नहीं। इंजन यह भी बताता है कि जैसे ही कोई ग्रह अक्ष को तोड़ता है, यह शिथिल हो जाता है।
स्रोत व निष्पक्ष टिप्पणी
प्रथा — एक आधुनिक, व्यापक रूप से अपनाया गया विन्यास, जो BPHS या शास्त्रीय ग्रंथ-समूह में परिभाषित नहीं है; इसे वैसा ही बताया गया है, न कि कोई गढ़ा हुआ श्लोक दिया गया है।
यह केवल प्रवृत्ति-स्तर का विवेचन है: दोष तौलने योग्य एक कारक है, किसी जीवन पर अंतिम निर्णय नहीं। दोष-भंग और उपाय पूरी कुंडली पर निर्भर करते हैं और परंपरागत रूप से किसी योग्य ज्योतिषी द्वारा ही आँके जाते हैं।
आपके प्रश्नों के उत्तर
काल सर्प दोष किससे बनता है?
सातों ग्रह (सूर्य से शनि तक) राशिचक्र के उस आधे भाग में पड़ते हैं जो राहु से केतु तक फैला है (या सभी दूसरे आधे भाग में)।
इंजन काल सर्प दोष के लिए ठीक क्या जाँचता है?
एक देशांतरीय चाप परीक्षण: प्रत्येक ग्रह की राहु से कोणीय दूरी की गणना की जाती है और दोष तभी दर्शाया जाता है जब सातों चाप एक ही ओर हों (≤180° या ≥180°)।
काल सर्प दोष कितना गंभीर है?
उपस्थित होने पर मध्यम; अन्यथा कोई नहीं। इंजन यह भी बताता है कि जैसे ही कोई ग्रह अक्ष को तोड़ता है, यह शिथिल हो जाता है।
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