स्रोत व पद्धति
Tara Junction पर हर संख्या और वाक्य कैसे बनता है — और वे शास्त्रीय ग्रंथ जिन तक ये नियम पहुँचते हैं।
वास्तविक पंचांग-गणित से स्थितियाँ
ग्रहों के देशांतर, सूर्योदय/सूर्यास्त और ग्रहण-क्षण एक खगोलीय गणित-इंजन (astronomy-engine) द्वारा अनुरोध के समय गणना किए जाते हैं — चाप-मिनट तक, स्थान के सटीक निर्देशांक और समय-क्षेत्र के लिए। कुछ भी किसी छपे पंचांग से नहीं देखा जाता।
लहिरी अयनांश, निरयण राशिचक्र
सार्वजनिक पृष्ठ लहिरी (चित्रापक्ष) अयनांश प्रयोग करते हैं — अधिकांश भारतीय ज्योतिषियों द्वारा अपनाया गया मानक। कुंडली उपकरण बी.वी. रमन और KP अयनांश भी देता है; सार्वजनिक पंचांग पृष्ठ अपना मॉडल पृष्ठ पर बताते हैं और केवल एक ही मानक रूप प्रकाशित करते हैं।
सूर्योदय पर आधारित पंचांग
तिथि, नक्षत्र, योग और करण नगर के अपने गणना किए सूर्योदय पर पढ़े जाते हैं — शास्त्रीय "सूर्योदय की तिथि ही दिन का नाम" परिपाटी (वही नियम जो दृक्-शैली पंचांग अपनाते हैं)। दिन की अवधियाँ (राहु काल, चौघड़िया, होरा) वास्तविक दिन और रात के चापों को बाँटती हैं, इसलिए उनके घड़ी-समय ऋतुओं के साथ बदलते हैं।
कोई अनुमान नहीं — प्रमाणित और उद्धृत
हमारी सूची का हर योग एक शास्त्रीय उद्धरण और सत्यापन-स्थिति लिए है: किसी स्वतंत्र सॉफ़्टवेयर क्रियान्वयन (PyJHora) के विरुद्ध या प्रकाशित साधित उदाहरणों के विरुद्ध जाँचा गया। जहाँ परंपरा वास्तव में विभाजित होती है, हम एक रूप निश्चित करके वह बताते हैं; जहाँ कोई नियम शास्त्रीय सिद्धांत न होकर आधुनिक परिपाटी है (कुछ दोष), वहाँ पृष्ठ यह भी कहता है। व्याख्यात्मक पाठ या तो तथ्य-विशेषताओं से रचा गया है या उद्धृत है — कभी गढ़ा नहीं गया।
प्रवृत्तियाँ, भविष्यवाणी नहीं
हम केवल सामान्य प्रवृत्तियाँ प्रकाशित करते हैं — कभी घटना, तिथि या परिणाम की भविष्यवाणी नहीं, और कभी चिकित्सकीय परामर्श नहीं। हर भविष्यसूचक पटल इंजन का अपना सावधानी-पाठ लिए होता है।
जिन शास्त्रीय ग्रंथों का हम उल्लेख करते हैं
हमारी अपनी संक्षिप्त व्याख्याओं सहित एक उद्धरण-सूची — कोई कॉपीराइट अनुवाद-पाठ पुनः प्रस्तुत नहीं किया जाता।
Brihat Parashara Hora Shastra · बृहत् पराशर होरा शास्त्र
Sage Parashara · classical (foundational)
आधारभूत पाराशरी ग्रंथ — ग्रह और भाव के कारकत्व, ग्रह-अवस्था (उच्च, स्वक्षेत्र आदि), षोडशवर्ग, विंशोत्तरी और सशर्त दशाएँ, अष्टकवर्ग, योग, आयुर्दाय तथा उपायों के अधिदेवता।
- Graha & bhava significations: प्रत्येक ग्रह का कारकत्व और प्रत्येक भाव के विषय-क्षेत्र — समस्त विवेचन का आधार। (प्रयोग: Reading, Delineations, Combination Explorer)
- Vimshottari & conditional dashas: नक्षत्र-आधारित 120-वर्षीय दशा और उसके सशर्त रूप (अष्टोत्तरी, षोडशोत्तरी आदि)। (प्रयोग: Dasha)
- Ashtakavarga: बिंदु-प्रणाली (भिन्न/सर्व) और शोधन-विधियाँ (त्रिकोण/एकाधिपत्य शोधन, शोध्य पिंड)। (प्रयोग: Ashtakavarga)
- Ayurdaya (longevity framework): पिंड/निसर्ग/अंश की त्रिविध आयुर्दाय रूपरेखा (वर्ष-गणना के रूप में नहीं, केवल एक श्रेणी के रूप में प्रस्तुत)। (प्रयोग: Strength)
- Graha-bhava-phala: भावों में ग्रहों के फल — विवेचन ओवरले में केवल वहीं उद्धृत जहाँ कोई विशिष्ट श्लोक उपलब्ध है। (प्रयोग: Delineations)
- Remedial devatas: उपाय-उपासना में प्रयुक्त ग्रहों के अधिदेवता/प्रत्यधिदेवता। (प्रयोग: Remedies)
संस्कृत मूल सार्वजनिक डोमेन में है; आधुनिक अंग्रेज़ी अनुवाद (जैसे संथानम) कॉपीराइट-संरक्षित हैं।
Phaladeepika · फलदीपिका
Mantreswara · classical
एक संक्षिप्त, फल-केंद्रित शास्त्रीय ग्रंथ — भाव और दशा के फल, योग तथा ग्रहों के प्रभाव।
- Dasha-phala: प्रत्येक महादशा-स्वामी के सामान्य फल, जो चल रही अवधि के लिए प्रवृत्तियों के रूप में प्रस्तुत किए जाते हैं। (प्रयोग: Reading, Delineations)
- Bhava-phala: भाव-फल के कथन, जिन्हें ग्रह-भाव विवेचन ओवरले में संदर्भित किया गया है। (प्रयोग: Delineations)
संस्कृत मूल सार्वजनिक डोमेन में है; आधुनिक अनुवाद कॉपीराइट-संरक्षित हैं।
Saravali · सारावली
Kalyana Varma · classical
योगों और ग्रह-फलों का विस्तृत विवेचन, संयोजन-परिभाषाओं के लिए व्यापक रूप से उद्धृत।
- Yoga definitions: शास्त्रीय संयोजन-परिभाषाएँ, जिन्हें साक्षी-आधारित योग सूची से मिलाकर जाँचा गया है। (प्रयोग: Yogas, Combination Explorer)
संस्कृत मूल सार्वजनिक डोमेन में है; आधुनिक अनुवाद कॉपीराइट-संरक्षित हैं।
Brihat Jataka · बृहज्जातक
Varahamihira · classical
जन्मकुंडली-शास्त्र का एक आधार-स्तंभ ग्रंथ — ग्रहों के स्वभाव, रत्न–ग्रह संगतियाँ और प्रमुख योग।
- Gem–graha correspondence: प्रति ग्रह रत्न-निर्धारण, जिस पर उपायों की संदर्भ-तालिका आधारित है। (प्रयोग: Remedies)
- Mahapurusha & core yogas: पंच-महापुरुष तथा उनसे जुड़े योगों की परिभाषाएँ। (प्रयोग: Yogas)
संस्कृत मूल सार्वजनिक डोमेन में है; पुराने अनुवाद अधिकार-क्षेत्र के अनुसार सार्वजनिक डोमेन में हो सकते हैं।
Jaimini Sutras (Upadesa Sutras) · जैमिनि सूत्र
Sage Jaimini · classical
जैमिनि पद्धति — चर कारक, राशि दशाएँ, अर्गला और विशेष लग्न।
- Chara karakas & rasi dashas: कारक-योजना तथा नारायण/स्थिर/शूल/दृग/सुदशा राशि दशाएँ। (प्रयोग: Jaimini, Dasha)
- Argala (intervention): अर्गला/विरोध-अर्गला के भाव-हस्तक्षेप नियम। (प्रयोग: Jaimini)
संस्कृत मूल सार्वजनिक डोमेन में है; आधुनिक अनुवाद कॉपीराइट-संरक्षित हैं।
Muhurta Chintamani · मुहूर्त चिन्तामणि
Ram Daivajna · classical
मुहूर्त-निर्धारण का मानक ग्रंथ — नक्षत्रों के स्वभाव, तिथि/योग की उपयुक्तता और समय-अवधियाँ।
- Nakshatra 7-fold nature: ध्रुव/चर/उग्र/… का कर्म-वर्गीकरण, जो मुहूर्त और नक्षत्र विवेचन में प्रयुक्त होता है। (प्रयोग: Panchang, Delineations)
- Panchanga shuddhi: तिथि/नक्षत्र/योग की शुभता को मिलाकर किया गया दैनिक मुहूर्त-आकलन। (प्रयोग: Panchang)
- Janma-nama akshara (Avakahada chakra): जन्म-नाम हेतु परंपरागत रूप से प्रयुक्त नक्षत्र-पद आरंभिक-अक्षर तालिका (अवकहड़ा चक्र); नामकरण कैलकुलेटर नक्षत्र व पद की यथार्थ गणना करते हुए इस परंपरा को देखता है। रोमन उच्चारण बी.वी. रमन की मुहूर्त / दृक् पंचांग के अनुसार, प्रलेखित क्षेत्रीय भेद सहित। (प्रयोग: Calculators)
संस्कृत मूल सार्वजनिक डोमेन में है; आधुनिक अनुवाद कॉपीराइट-संरक्षित हैं।
Mantra Mahodadhi · मन्त्रमहोदधि
Mahidhara · classical
एक तांत्रिक मंत्र-संग्रह — नवग्रह बीज मंत्र और पुरश्चरण जप-संख्याएँ।
- Navagraha japa counts: उपाय-संदर्भ में प्रयुक्त पुरश्चरण जप-समुच्चय (कुल योग 1,30,000)। (प्रयोग: Remedies)
संस्कृत मूल सार्वजनिक डोमेन में है; आधुनिक अनुवाद कॉपीराइट-संरक्षित हैं।
Dharmasindhu · धर्मसिन्धु
Kashinath Upadhyaya · early-modern (c.1790–91)
ग्रहण-सुतक, स्नान व दान-काल सहित नित्य/नैमित्तिक कर्मों का धर्मशास्त्रीय संग्रह, जो पूर्व-स्मृतियों को संकलित करता है — निर्णयसिन्धु (कमलाकर भट्ट, लगभग 1612) से ग्रहण-सुतक अवधि हेतु मिलान।
- Grahana-sutaka (eclipse sutak window): ग्रहण-सुतक की स्मृति-अवधि (धर्मसिन्धु, ग्रहण-निर्णय प्रकरण — सप्रयोजन प्रकरण-स्तरीय संदर्भ, पूर्व-स्मृतियों का संकलन; श्लोक-स्तरीय स्थान का दावा नहीं किया गया)। स्मार्त मत के अनुसार सूर्यग्रहण में सुतक स्पर्श — प्रथम प्रच्छाया (उम्ब्रल)/दृश्य संपर्क — से 4 प्रहर (~12 घंटे) पूर्व तथा चंद्रग्रहण में 3 प्रहर (~9 घंटे) पूर्व आरंभ होकर मोक्ष (अंतिम प्रच्छाया-संपर्क) पर समाप्त होता है; यह केवल वहीं माना जाता है जहाँ ग्रहण स्थानीय रूप से दृश्य हो, अतः क्षितिज के नीचे रहने वाले ग्रहण में सुतक नहीं। उपच्छाया (penumbral) चरण वर्जित है, और केवल-उपच्छाया चंद्रग्रहण ग्रहण नहीं माना जाता, अतः उसमें सुतक नहीं। CONVENTION (स्थिर, एकमात्र सत्य के रूप में नहीं): प्रहर को नाममात्र ~3 घंटे माना गया है, यद्यपि याम वस्तुतः दिन या रात्रि का परिवर्तनशील चतुर्थांश है; भूकेंद्रीय प्रच्छाया-स्पर्श ही अवधि का आधार है, भले वह स्थानीय क्षितिज के नीचे हो (ग्रस्तोदय/ग्रस्तास्त — उदय या अस्त के समय चल रहा ग्रहण); वैष्णव व क्षेत्रीय मत वेध/अपवाद में भिन्न हैं, कुछ तालिकाएँ नियत घंटे से गणना करती हैं, तथा घटित-सुतक की छूट (बालक, रोगी, वृद्ध) भी है। मंच स्मार्त स्पर्श-आधारित नियम को स्थिर मानकर केवल आरंभ/अंत क्षण दर्शाता है (कोई फलादेश नहीं) और भेद प्रकट करता है। (प्रयोग: Eclipses)
संस्कृत मूल सार्वजनिक डोमेन में है; आधुनिक अनुवाद कॉपीराइट-संरक्षित हैं।
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