रत्न मार्गदर्शिका — कौन-सा ग्रह, कौन धारण करे
नौ नवरत्न और वह ग्रह जिसे परंपरा से प्रत्येक बल देने हेतु धारण किया जाता है। कोई रत्न किसी कुंडली के अनुकूल तभी है जब उसका ग्रह वहाँ कार्यगत रूप से हितकारी हो — योग्य ज्योतिषी द्वारा, परीक्षण के आधार पर निर्धारित, कभी भय या लाभ-लोभ से नहीं।
माणिक्य
सूर्य को बल देता है
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प्राकृतिक मोती
चंद्र को बल देता है
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मूँगा
मंगल को बल देता है
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पन्ना
बुध को बल देता है
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पुखराज
गुरु को बल देता है
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हीरा
शुक्र को बल देता है
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नीलम
शनि को बल देता है
अत्यधिक सावधानी वाला रत्न — केवल परीक्षण पर।
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गोमेद
राहु को बल देता है
अत्यधिक सावधानी वाला रत्न — केवल परीक्षण पर।
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लहसुनिया
केतु को बल देता है
अत्यधिक सावधानी वाला रत्न — केवल परीक्षण पर।
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इसे अपनी कुंडली में देखें — पूरी वैदिक कुंडली निःशुल्क है, बिना साइन-अप के।
अपनी निःशुल्क कुंडली बनाएँ →शास्त्रीय नवरत्न–ग्रह संबंधों (बृहज्जातक व मानक उपाय ग्रंथ) से संदर्भ। एक पारंपरिक सहायक, आदेश नहीं — किसी फल का दावा नहीं और कुछ भी नहीं बेचा जाता।
लहिरी अयनांश (निरयण) से गणना। पंचांग मान स्थानीय सूर्योदय पर आधारित हैं। हम गणना कैसे करते हैं →