रत्न मार्गदर्शिका — कौन-सा ग्रह, कौन धारण करे

नौ नवरत्न और वह ग्रह जिसे परंपरा से प्रत्येक बल देने हेतु धारण किया जाता है। कोई रत्न किसी कुंडली के अनुकूल तभी है जब उसका ग्रह वहाँ कार्यगत रूप से हितकारी हो — योग्य ज्योतिषी द्वारा, परीक्षण के आधार पर निर्धारित, कभी भय या लाभ-लोभ से नहीं।

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शास्त्रीय नवरत्न–ग्रह संबंधों (बृहज्जातक व मानक उपाय ग्रंथ) से संदर्भ। एक पारंपरिक सहायक, आदेश नहीं — किसी फल का दावा नहीं और कुछ भी नहीं बेचा जाता।

लहिरी अयनांश (निरयण) से गणना। पंचांग मान स्थानीय सूर्योदय पर आधारित हैं। हम गणना कैसे करते हैं →