पुखराज
गुरु का रत्न
कौन धारण करे
शास्त्रीय परंपरा में पुखराज गुरु को बल देने हेतु धारण किया जाता है — केवल उस कुंडली हेतु उपयुक्त जहाँ गुरु कार्यगत रूप से हितकारी हो (लग्न-मित्र या योगकारक ग्रह, अथवा चालू दशा का स्वामी), जिसे पूर्ण कुंडली निर्धारित करती है। यह किसी फल का दावा नहीं करता और पहले परीक्षण के आधार पर धारण किया जाता है।
धारण संदर्भ
| धातु | सोना |
| उँगली | तर्जनी |
| दिन | गुरुवार |
| रंग | पीला |
मंत्र व शांति
पौराणिक मंत्र: ॐ गुरवे नमः
बीज मंत्र: ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरवे नमः
पारंपरिक जप संख्या: 19000।
संबंधित रुद्राक्ष: 5-मुखी।
रत्न-निर्धारण एक पारंपरिक सहायक है, आदेश नहीं, और रत्न-परंपराएँ परस्पर असहमत हैं — पत्थर योग्य ज्योतिषी द्वारा चुना व समयित किया जाना चाहिए और पहले परीक्षण के आधार पर धारण किया जाना चाहिए। यहाँ कुछ भी नहीं बेचा जाता।
आपके प्रश्नों के उत्तर
पुखराज किस ग्रह का रत्न है?
पुखराज गुरु का प्रमुख रत्न है। यह आपके अनुकूल है या नहीं, यह आपकी अपनी कुंडली में गुरु की कार्यगत भूमिका पर निर्भर करता है, केवल रत्न पर नहीं।
क्या पुखराज सभी को धारण करना चाहिए?
नहीं। यह केवल तभी उपयुक्त है जब योग्य ज्योतिषी पुष्टि करे कि वह ग्रह आपकी कुंडली हेतु कार्यगत रूप से हितकारी है, परीक्षण के आधार पर — कभी भय-प्रेरित या सबके लिए एक-समान उपाय नहीं।
देखें आपकी कुंडली किन ग्रहों को अनुकूल पाती है
अपनी निःशुल्क कुंडली बनाएँ →शास्त्रीय नवरत्न–ग्रह संबंधों (बृहज्जातक व मानक उपाय ग्रंथ) से संदर्भ। एक पारंपरिक सहायक, आदेश नहीं — किसी फल का दावा नहीं और कुछ भी नहीं बेचा जाता।
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