पितृ दोष

यह क्या है

पितृ-कर्म का संकेत, जिसे परंपरागत रूप से 9वें भाव (पितृ-स्थान) पर या सूर्य पर पीड़ा से पढ़ा जाता है।

निर्माण-नियम

लग्न से 9वीं राशि में राहु या केतु हो, या शनि 9वें भाव में स्थित हो, या सूर्य किसी छाया-ग्रह के साथ युति में हो।

हमारा इंजन क्या जाँचता है

तीन परीक्षण: लग्न से 9वीं राशि में छाया-ग्रह की उपस्थिति; 9वें भाव में शनि की स्थिति; और सूर्य–छाया-ग्रह की राशि-स्तरीय युति।

तीव्रता आकलन

उपस्थित होने पर निम्न; अन्यथा कोई नहीं। परंपरागत रूप से इसे तर्पण और दान के माध्यम से संबोधित किया जाता है।

स्रोत व निष्पक्ष टिप्पणी

प्रथा — पितृ दोष का सामान्य 9वें भाव/सूर्य पीड़ा-आधारित विवेचन; कोई एक शास्त्रीय श्लोक इसे परिभाषित नहीं करता, और हम यह स्पष्ट कहते हैं।

यह केवल प्रवृत्ति-स्तर का विवेचन है: दोष तौलने योग्य एक कारक है, किसी जीवन पर अंतिम निर्णय नहीं। दोष-भंग और उपाय पूरी कुंडली पर निर्भर करते हैं और परंपरागत रूप से किसी योग्य ज्योतिषी द्वारा ही आँके जाते हैं।

आपके प्रश्नों के उत्तर

पितृ दोष किससे बनता है?

लग्न से 9वीं राशि में राहु या केतु हो, या शनि 9वें भाव में स्थित हो, या सूर्य किसी छाया-ग्रह के साथ युति में हो।

इंजन पितृ दोष के लिए ठीक क्या जाँचता है?

तीन परीक्षण: लग्न से 9वीं राशि में छाया-ग्रह की उपस्थिति; 9वें भाव में शनि की स्थिति; और सूर्य–छाया-ग्रह की राशि-स्तरीय युति।

पितृ दोष कितना गंभीर है?

उपस्थित होने पर निम्न; अन्यथा कोई नहीं। परंपरागत रूप से इसे तर्पण और दान के माध्यम से संबोधित किया जाता है।

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