ग्रहण — इलाहाबाद (प्रयागराज) 2027
2027 के प्रत्येक सूर्य व चंद्र ग्रहण की इलाहाबाद (प्रयागराज) से देखी गई स्थानीय स्थिति: स्थानीय समय में स्पर्श-समय, प्रत्येक संपर्क पर ग्रहणग्रस्त पिंड की ऊँचाई, ग्रसन और सुतक-काल। क्षण एक सटीक खगोलीय खोज (निरयण, लाहिड़ी) से।
इलाहाबाद (प्रयागराज) से दृश्य = प्रच्छाया (आंशिक या पूर्ण) चरण के कम-से-कम कुछ भाग के दौरान ग्रहणग्रस्त पिंड आपके क्षितिज से ऊपर हो — यही नग्न-नेत्र ग्रहण है। ऊँचाई पिंड के केंद्र हेतु आभासी (अपवर्तन-सुधारित) है; केंद्र की 0° ऊँचाई पर भी बिंब का ऊपरी किनारा लगभग 0.8° ऊपर रहता है, अतः क्षितिज को छूता ग्रहण भी वास्तव में दृश्य होता है।
वलयाकार सूर्य ग्रहण — 6 फ़र॰, 21:29
इलाहाबाद (प्रयागराज) से अदृश्य — ग्रहणग्रस्त पिंड सम्पूर्ण प्रच्छाया चरण में क्षितिज के नीचे रहता है।निरयण स्थिति: 23°23′ मकर · धनिष्ठा
उपच्छाया चंद्र ग्रहण — 21 फ़र॰, 04:42
केवल उपच्छायानिरयण स्थिति: 7°45′ सिंह · मघा
केवल उपच्छाया ग्रहण — चंद्रमा पृथ्वी की बाह्य छाया (उपच्छाया) से गुजरता है। मंदता अल्प व प्रायः अगोचर होती है; कोई प्रच्छाया चरण नहीं और कोई सुतक नहीं।
| चरण | स्थानीय समय | ऊँचाई | चरण प्रकार |
|---|---|---|---|
| उपच्छाया आरंभ | 21 फ़र॰, 02:41 | +50.4° | उपच्छाया |
| चरम | 21 फ़र॰, 04:42 | +23.9° | उपच्छाया |
| उपच्छाया समाप्त | 21 फ़र॰, 06:43 | -2.0° | उपच्छाया |
उपच्छाया चंद्र ग्रहण — 18 जुल॰, 21:32
केवल उपच्छायानिरयण स्थिति: 1°43′ मकर · उत्तराषाढ़ा
केवल उपच्छाया ग्रहण — चंद्रमा पृथ्वी की बाह्य छाया (उपच्छाया) से गुजरता है। मंदता अल्प व प्रायः अगोचर होती है; कोई प्रच्छाया चरण नहीं और कोई सुतक नहीं।
| चरण | स्थानीय समय | ऊँचाई | चरण प्रकार |
|---|---|---|---|
| उपच्छाया आरंभ | 18 जुल॰, 21:20 | +26.1° | उपच्छाया |
| चरम | 18 जुल॰, 21:32 | +28.1° | उपच्छाया |
| उपच्छाया समाप्त | 18 जुल॰, 21:45 | +29.9° | उपच्छाया |
आंशिक सूर्य ग्रहण — 2 अग॰, 15:36
इलाहाबाद (प्रयागराज) से दृश्यनिरयण स्थिति: 15°40′ कर्क · पुष्य · चरम पर ग्रसन: 8%
| चरण | स्थानीय समय | ऊँचाई | चरण प्रकार |
|---|---|---|---|
| आंशिक आरंभ | 2 अग॰, 16:03 | +35.4° | प्रच्छाया |
| चरम | 2 अग॰, 16:36 | +27.9° | प्रच्छाया |
| आंशिक समाप्त | 2 अग॰, 17:08 | +20.7° | प्रच्छाया |
स्मार्त मत (CONVENTION): सुतक स्पर्श — प्रथम प्रच्छाया-संपर्क — से 4 प्रहर (~12 घंटे, सूर्यग्रहण) या 3 प्रहर (~9 घंटे, चंद्रग्रहण) पूर्व आरंभ होकर मोक्ष (अंतिम प्रच्छाया-संपर्क) पर समाप्त; केवल वहीं जहाँ ग्रहण स्थानीय रूप से दृश्य हो। प्रहर को नाममात्र ~3 घंटे माना गया है। वैष्णव व क्षेत्रीय मत वेध और अपवादों में भिन्न हैं, कुछ तालिकाएँ नियत घंटे से गणना करती हैं, तथा घटित-सुतक की छूट (बालक, रोगी, वृद्ध) भी है। हम स्मार्त स्पर्श-आधारित नियम को स्थिर मानते हैं और केवल आरंभ/अंत क्षण दर्शाते हैं।
सुतक परंपरा: धर्मसिन्धु / निर्णयसिन्धु — स्रोत व पद्धति
उपच्छाया चंद्र ग्रहण — 17 अग॰, 12:43
केवल उपच्छायानिरयण स्थिति: 29°50′ मकर · धनिष्ठा
केवल उपच्छाया ग्रहण — चंद्रमा पृथ्वी की बाह्य छाया (उपच्छाया) से गुजरता है। मंदता अल्प व प्रायः अगोचर होती है; कोई प्रच्छाया चरण नहीं और कोई सुतक नहीं।
| चरण | स्थानीय समय | ऊँचाई | चरण प्रकार |
|---|---|---|---|
| उपच्छाया आरंभ | 17 अग॰, 10:53 | -69.8° | उपच्छाया |
| चरम | 17 अग॰, 12:43 | -74.2° | उपच्छाया |
| उपच्छाया समाप्त | 17 अग॰, 14:33 | -53.4° | उपच्छाया |
निकटवर्ती नगर
आपके प्रश्नों के उत्तर
2027 में इलाहाबाद (प्रयागराज) से कितने ग्रहण दृश्य हैं?
2027 में चरम को प्राप्त 5 ग्रहणों में से 1 इलाहाबाद (प्रयागराज) से देखे जा सकते हैं — शेष अपने प्रच्छाया चरण में क्षितिज के नीचे रहते हैं।
2027 में इलाहाबाद (प्रयागराज) से पहला दृश्य ग्रहण कौन-सा है?
आंशिक सूर्य ग्रहण — 2 अग॰, 15:36, निरयण कर्क (पुष्य नक्षत्र) में।
सुतक (ग्रहण) काल क्या है?
सुतक दृश्य ग्रहण के आसपास की स्मृति-अशौच अवधि है। हमारे द्वारा उद्धृत स्मार्त मत के अनुसार यह प्रथम प्रच्छाया-संपर्क से ~12 घंटे (सूर्य) या ~9 घंटे (चंद्र) पूर्व आरंभ होकर अंतिम पर समाप्त होती है, और केवल वहीं लागू जहाँ ग्रहण दृश्य हो।
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लहिरी अयनांश (निरयण) से गणना। पंचांग मान स्थानीय सूर्योदय पर आधारित हैं। हम गणना कैसे करते हैं →