एकादशी तिथियाँ 2026
नई दिल्ली पर नामित व्रत, पालन दिवस (वृद्धि एकादशी → दूसरा दिन, द्रिक पंचांग अनुसार) व द्वादशी पारण अवधि सहित।
| एकादशी | तिथि | पक्ष | पारण अवधि |
|---|---|---|---|
| षट्तिला | कृष्ण | 07:14–09:21 | |
| जया | शुक्ल | 07:10–09:20 | |
| विजया | कृष्ण | 07:00–09:14 | |
| आमलकी | शुक्ल | 06:47–09:06 | |
| पापमोचनी | कृष्ण | 06:30–08:54 | |
| कामदा | शुक्ल | 06:13–07:10 | |
| वरूथिनी | कृष्ण | 06:55–08:30 | |
| मोहिनी | शुक्ल | 05:43–08:21 | |
| अपरा | कृष्ण | 05:31–08:13 | |
| पद्मिनी | शुक्ल | 05:24–07:57 | |
| परमा | कृष्ण | 05:22–08:10 | |
| निर्जला | शुक्ल | 05:25–08:12 | |
| योगिनी | कृष्ण | 13:49–16:35 | |
| देवशयनी | शुक्ल | 05:39–08:22 | |
| कामिका | कृष्ण | 05:47–08:01 | |
| श्रावण पुत्रदा | शुक्ल | 13:41–16:16 | |
| अजा | कृष्ण | 06:02–08:33 | |
| पार्श्व | शुक्ल | 06:09–08:35 | |
| इंदिरा | कृष्ण | 06:17–08:37 | |
| पापांकुशा | शुक्ल | 06:26–08:42 | |
| रमा | कृष्ण | 06:36–08:47 | |
| देवउत्थान | शुक्ल | 13:10–15:17 | |
| उत्पन्ना | कृष्ण | 06:59–09:04 | |
| मोक्षदा | शुक्ल | 07:09–09:13 |
नाम मानक (पूर्णिमांत) परंपरा अनुसार, अमांत मास से संबद्ध; व्रत तिथि द्रिक पंचांग की प्रकाशित सूची अनुसार (वृद्धि एकादशी दूसरे, दशमी-रहित दिन)। पालन संप्रदाय अनुसार भिन्न — स्मार्त व वैष्णव में एक दिन का अंतर हो सकता है। दर्शित पारण द्वादशी की अनुकूल अवधि है।
आपके प्रश्नों के उत्तर
2026 में कितने एकादशी होते हैं?
संदर्भ स्थान पर 2026 में 24 एकादशी अवसर हैं, प्रत्येक वास्तविक तिथि से गणना।
एकादशी के नाम कैसे निर्धारित होते हैं?
प्रत्येक एकादशी का नाम उसके चंद्रमास व पक्ष से, मानक (पूर्णिमांत) परंपरा अनुसार, यहाँ अमांत मास से संबद्ध। अधिक मास पद्मिनी व परमा जोड़ता है। कुछ नामों के क्षेत्रीय भेद हैं, परंपरा रूप में प्रकट।
पारण (व्रत तोड़ना) कब होता है?
द्वादशी को, सूर्योदय के बाद व हरि वासर (द्वादशी का प्रथम चतुर्थांश) समाप्त होने के बाद, तथा द्वादशी समाप्त होने से पूर्व। दर्शित अवधि अनुकूल है — प्रातःकाल, या हरि वासर के प्रातःकाल ढकने पर अपराह्न।
क्या ये तिथियाँ स्थान-विशिष्ट हैं?
तिथि क्षण वैश्विक हैं; सूर्योदय-आधारित दिन नई दिल्ली पर गणना है और अन्यत्र एक दिन खिसक सकता है।
आज का पूर्ण पंचांग देखें
अपनी निःशुल्क कुंडली बनाएँ →तिथि सूर्य–चंद्र दूरी से; पालन दिवस (उदय; वृद्धि → दूसरा दिन, द्रिक पंचांग अनुसार) व द्वादशी पारण अवधि (सूर्योदय व हरि वासर के बाद) नई दिल्ली पर गणित। द्रिक-सत्यापित; पालन संप्रदाय अनुसार भिन्न। निरयण (लाहिरी)।
लहिरी अयनांश (निरयण) से गणना। पंचांग मान स्थानीय सूर्योदय पर आधारित हैं। हम गणना कैसे करते हैं →