हिंदू चंद्र मास — 2027
13 अमांत चंद्र मास, अमावस्या से अमावस्या तक, नई दिल्ली हेतु।
| मास | प्रकार | आरंभ (अमावस्या) | समाप्त (अमावस्या) | नामकारी संक्रांति |
|---|---|---|---|---|
| पौष | निज (सामान्य) | मकर | ||
| माघ | निज (सामान्य) | कुंभ | ||
| फाल्गुन | निज (सामान्य) | मीन | ||
| चैत्र | निज (सामान्य) | मेष | ||
| वैशाख | निज (सामान्य) | वृषभ | ||
| ज्येष्ठ | निज (सामान्य) | मिथुन | ||
| आषाढ़ | निज (सामान्य) | कर्क | ||
| श्रावण | निज (सामान्य) | सिंह | ||
| भाद्रपद | निज (सामान्य) | कन्या | ||
| आश्विन | निज (सामान्य) | तुला | ||
| कार्तिक | निज (सामान्य) | वृश्चिक | ||
| मार्गशीर्ष | निज (सामान्य) | धनु | ||
| पौष | निज (सामान्य) | मकर |
आपके प्रश्नों के उत्तर
अधिक मास क्या है?
अधिक मास वह अतिरिक्त चंद्र मास है जिसमें कोई सौर संक्रांति नहीं पड़ती; चंद्र व सौर वर्ष को समरूप रखने हेतु लगभग हर तीन वर्ष में जोड़ा जाता है। यह आगामी मास का नाम लेता है — 2026 में अधिक ज्येष्ठ।
अमांत और पूर्णिमांत मास में क्या भेद है?
अमांत मास अमावस्या से अमावस्या तक चलते हैं (पश्चिम व दक्षिण भारत); पूर्णिमांत पूर्णिमा से पूर्णिमा तक (उत्तर भारत)। इनमें एक पक्ष का भेद है — अमांत मास का कृष्ण पक्ष आगामी पूर्णिमांत मास में पड़ता है। यह पृष्ठ अमांत गणना करता है।
प्रत्येक मास का नाम कैसे पड़ता है?
उसमें पड़ने वाली सौर संक्रांति की राशि से — एक साक्षी शास्त्रीय परंपरा (सूर्य सिद्धांत)। प्रत्येक नाम के साथ संबंधित संक्रांति दर्शाई गई है।
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अपनी निःशुल्क कुंडली बनाएँ →अमांत मास एफ़ेमेरिस से अमावस्या-से-अमावस्या गणित हैं; नामकारी संक्रांति मास के भीतर सूर्य की निरयण (लाहिड़ी) राशि-प्रवेश है। तिथियाँ व समय नई दिल्ली हेतु दर्शाए गए हैं। मास का नाम एक साक्षी शास्त्रीय परंपरा (सूर्य सिद्धांत) है, कोई दावा नहीं; पूर्णिमांत भेद (अमांत मास का कृष्ण पक्ष = आगामी पूर्णिमांत मास) प्रकट है, और क्षय-मास के नाम किसी साक्षी स्रोत तक स्थगित हैं।
लहिरी अयनांश (निरयण) से गणना। पंचांग मान स्थानीय सूर्योदय पर आधारित हैं। हम गणना कैसे करते हैं →