आर्द्रा नक्षत्र

27 में से #6 · 66°40′–80°00′ निरयण · मिथुन में

विशेषताएँ

स्वामी ग्रह (विंशोत्तरी स्वामी) राहु
देवता रुद्र
प्रतीक अश्रु-बिंदु
गण (स्वभाव) मनुष्य (मानव) गण का स्वभाव — संतुलित, महत्वाकांक्षी और व्यावहारिक
नाड़ी (प्रकृति) वात (वायव्य) प्रकृति — तीव्र, गतिशील और सृजनशील
योनि (सहज-प्रवृत्ति) श्वान — निष्ठावान और रक्षक
स्वभाव (मुहूर्त) तीक्ष्ण — तीक्ष्ण कार्यों (अनुशासन, एकाग्रता, विच्छेद) के लिए उपयुक्त

चार पद

पदविस्तार (निरयण)राशि
1 66°40′ – 70°00′ मिथुन (Mithuna)
2 70°00′ – 73°20′ मिथुन (Mithuna)
3 73°20′ – 76°40′ मिथुन (Mithuna)
4 76°40′ – 80°00′ मिथुन (Mithuna)

प्रत्येक पद 3°20′ का है — 13°20′ चाप का नवांश-तुल्य चौथाई भाग।

आर्द्रा का विवेचन

आर्द्रा — अधिष्ठाता देव रुद्र, प्रतीक "अश्रु-बिंदु", स्वामी राहु। इसमें मनुष्य (मानव) गण का स्वभाव — संतुलित, महत्वाकांक्षी और व्यावहारिक है, साथ ही वात (वायव्य) प्रकृति — तीव्र, गतिशील और सृजनशील; निष्ठावान और रक्षक सहज-प्रवृत्ति (श्वान योनि)। राहु का स्वामित्व महत्वाकांक्षा, गहन आसक्ति (व्यामोह), विदेशी विषय, नवाचार और सांसारिक इच्छा प्रदान करता है। यहाँ की ऊर्जाएँ तीक्ष्ण कार्यों (अनुशासन, एकाग्रता, विच्छेद) के अनुकूल हैं।

तथ्य-विशेषताओं (देवता / प्रतीक / स्वामी / गण / नाड़ी / योनि / स्वभाव) से रचित — वही उद्धृत विवेचना जो कुंडली डैशबोर्ड दिखाता है; केवल सामान्य प्रवृत्तियाँ, कभी घटनाएँ या परिणाम नहीं।

आपके प्रश्नों के उत्तर

आर्द्रा नक्षत्र का स्वामी कौन सा ग्रह है?

राहु — आर्द्रा का विंशोत्तरी दशा स्वामी।

आर्द्रा के देवता कौन हैं?

रुद्र; इसका प्रतीक अश्रु-बिंदु है।

आर्द्रा किन अंशों में फैला है?

66°40′–80°00′ निरयण — अर्थात् 6°40′ मिथुन से 20°00′ मिथुन तक, मिथुन में।

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