आश्लेषा नक्षत्र
27 में से #9 · 106°40′–120°00′ निरयण · कर्क में
विशेषताएँ
| स्वामी ग्रह (विंशोत्तरी स्वामी) | बुध |
|---|---|
| देवता | नाग |
| प्रतीक | कुंडली मारे हुए सर्प |
| गण (स्वभाव) | राक्षस (उग्र) गण का स्वभाव — तीव्र, स्वेच्छाचारी और अपरंपरागत |
| नाड़ी (प्रकृति) | कफ (पार्थिव) प्रकृति — स्थिर, धैर्यवान और पोषक |
| योनि (सहज-प्रवृत्ति) | मार्जार — स्वतंत्र और सूक्ष्म |
| स्वभाव (मुहूर्त) | तीक्ष्ण — तीक्ष्ण कार्यों (अनुशासन, एकाग्रता, विच्छेद) के लिए उपयुक्त |
चार पद
| पद | विस्तार (निरयण) | राशि |
|---|---|---|
| 1 | 106°40′ – 110°00′ | कर्क (Karka) |
| 2 | 110°00′ – 113°20′ | कर्क (Karka) |
| 3 | 113°20′ – 116°40′ | कर्क (Karka) |
| 4 | 116°40′ – 120°00′ | कर्क (Karka) |
प्रत्येक पद 3°20′ का है — 13°20′ चाप का नवांश-तुल्य चौथाई भाग।
आश्लेषा का विवेचन
आश्लेषा — अधिष्ठाता देव नाग, प्रतीक "कुंडली मारे हुए सर्प", स्वामी बुध। इसमें राक्षस (उग्र) गण का स्वभाव — तीव्र, स्वेच्छाचारी और अपरंपरागत है, साथ ही कफ (पार्थिव) प्रकृति — स्थिर, धैर्यवान और पोषक; स्वतंत्र और सूक्ष्म सहज-प्रवृत्ति (मार्जार योनि)। बुध का स्वामित्व बुद्धि, संप्रेषण, व्यापार, विश्लेषण और अनुकूलनशीलता प्रदान करता है। यहाँ की ऊर्जाएँ तीक्ष्ण कार्यों (अनुशासन, एकाग्रता, विच्छेद) के अनुकूल हैं।
तथ्य-विशेषताओं (देवता / प्रतीक / स्वामी / गण / नाड़ी / योनि / स्वभाव) से रचित — वही उद्धृत विवेचना जो कुंडली डैशबोर्ड दिखाता है; केवल सामान्य प्रवृत्तियाँ, कभी घटनाएँ या परिणाम नहीं।
आपके प्रश्नों के उत्तर
आश्लेषा नक्षत्र का स्वामी कौन सा ग्रह है?
बुध — आश्लेषा का विंशोत्तरी दशा स्वामी।
आश्लेषा के देवता कौन हैं?
नाग; इसका प्रतीक कुंडली मारे हुए सर्प है।
आश्लेषा किन अंशों में फैला है?
106°40′–120°00′ निरयण — अर्थात् 16°40′ कर्क से 30°00′ कर्क तक, कर्क में।
क्या आश्लेषा आपका जन्म नक्षत्र है? अपनी निःशुल्क कुंडली बनाएँ और जन्म के समय चंद्रमा की सटीक स्थिति देखें।
अपनी निःशुल्क कुंडली बनाएँ →लहिरी अयनांश (निरयण) से गणना। पंचांग मान स्थानीय सूर्योदय पर आधारित हैं। हम गणना कैसे करते हैं →