चित्रा नक्षत्र
27 में से #14 · 173°20′–186°40′ निरयण · कन्या & तुला में
विशेषताएँ
| स्वामी ग्रह (विंशोत्तरी स्वामी) | मंगल |
|---|---|
| देवता | त्वष्टा |
| प्रतीक | चमकीला रत्न |
| गण (स्वभाव) | राक्षस (उग्र) गण का स्वभाव — तीव्र, स्वेच्छाचारी और अपरंपरागत |
| नाड़ी (प्रकृति) | पित्त (आग्नेय) प्रकृति — प्रेरित, तीक्ष्ण और निर्णायक |
| योनि (सहज-प्रवृत्ति) | व्याघ्र — साहसी और क्षेत्र-रक्षक |
| स्वभाव (मुहूर्त) | मृदु — सौम्य कार्यों (कला, मित्रता, सौंदर्य) के लिए उपयुक्त |
चार पद
| पद | विस्तार (निरयण) | राशि |
|---|---|---|
| 1 | 173°20′ – 176°40′ | कन्या (Kanya) |
| 2 | 176°40′ – 180°00′ | कन्या (Kanya) |
| 3 | 180°00′ – 183°20′ | तुला (Tula) |
| 4 | 183°20′ – 186°40′ | तुला (Tula) |
प्रत्येक पद 3°20′ का है — 13°20′ चाप का नवांश-तुल्य चौथाई भाग।
चित्रा का विवेचन
चित्रा — अधिष्ठाता देव त्वष्टा, प्रतीक "चमकीला रत्न", स्वामी मंगल। इसमें राक्षस (उग्र) गण का स्वभाव — तीव्र, स्वेच्छाचारी और अपरंपरागत है, साथ ही पित्त (आग्नेय) प्रकृति — प्रेरित, तीक्ष्ण और निर्णायक; साहसी और क्षेत्र-रक्षक सहज-प्रवृत्ति (व्याघ्र योनि)। मंगल का स्वामित्व ऊर्जा, साहस, प्रेरणा, भाई-बहन, अनुशासन और प्रतिस्पर्धी बल प्रदान करता है। यहाँ की ऊर्जाएँ सौम्य कार्यों (कला, मित्रता, सौंदर्य) के अनुकूल हैं।
तथ्य-विशेषताओं (देवता / प्रतीक / स्वामी / गण / नाड़ी / योनि / स्वभाव) से रचित — वही उद्धृत विवेचना जो कुंडली डैशबोर्ड दिखाता है; केवल सामान्य प्रवृत्तियाँ, कभी घटनाएँ या परिणाम नहीं।
आपके प्रश्नों के उत्तर
चित्रा नक्षत्र का स्वामी कौन सा ग्रह है?
मंगल — चित्रा का विंशोत्तरी दशा स्वामी।
चित्रा के देवता कौन हैं?
त्वष्टा; इसका प्रतीक चमकीला रत्न है।
चित्रा किन अंशों में फैला है?
173°20′–186°40′ निरयण — अर्थात् 23°20′ कन्या से 6°40′ तुला तक, कन्या और तुला में।
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