धनिष्ठा नक्षत्र

27 में से #23 · 293°20′–306°40′ निरयण · मकर & कुंभ में

विशेषताएँ

स्वामी ग्रह (विंशोत्तरी स्वामी) मंगल
देवता वसु
प्रतीक ढोल
गण (स्वभाव) राक्षस (उग्र) गण का स्वभाव — तीव्र, स्वेच्छाचारी और अपरंपरागत
नाड़ी (प्रकृति) पित्त (आग्नेय) प्रकृति — प्रेरित, तीक्ष्ण और निर्णायक
योनि (सहज-प्रवृत्ति) सिंह — प्रभुत्वशाली और गर्वीला
स्वभाव (मुहूर्त) चर — गति के कार्यों (यात्रा, परिवर्तन, वाहन) के लिए उपयुक्त

चार पद

पदविस्तार (निरयण)राशि
1 293°20′ – 296°40′ मकर (Makara)
2 296°40′ – 300°00′ मकर (Makara)
3 300°00′ – 303°20′ कुंभ (Kumbha)
4 303°20′ – 306°40′ कुंभ (Kumbha)

प्रत्येक पद 3°20′ का है — 13°20′ चाप का नवांश-तुल्य चौथाई भाग।

धनिष्ठा का विवेचन

धनिष्ठा — अधिष्ठाता देव वसु, प्रतीक "ढोल", स्वामी मंगल। इसमें राक्षस (उग्र) गण का स्वभाव — तीव्र, स्वेच्छाचारी और अपरंपरागत है, साथ ही पित्त (आग्नेय) प्रकृति — प्रेरित, तीक्ष्ण और निर्णायक; प्रभुत्वशाली और गर्वीला सहज-प्रवृत्ति (सिंह योनि)। मंगल का स्वामित्व ऊर्जा, साहस, प्रेरणा, भाई-बहन, अनुशासन और प्रतिस्पर्धी बल प्रदान करता है। यहाँ की ऊर्जाएँ गति के कार्यों (यात्रा, परिवर्तन, वाहन) के अनुकूल हैं।

तथ्य-विशेषताओं (देवता / प्रतीक / स्वामी / गण / नाड़ी / योनि / स्वभाव) से रचित — वही उद्धृत विवेचना जो कुंडली डैशबोर्ड दिखाता है; केवल सामान्य प्रवृत्तियाँ, कभी घटनाएँ या परिणाम नहीं।

आपके प्रश्नों के उत्तर

धनिष्ठा नक्षत्र का स्वामी कौन सा ग्रह है?

मंगल — धनिष्ठा का विंशोत्तरी दशा स्वामी।

धनिष्ठा के देवता कौन हैं?

वसु; इसका प्रतीक ढोल है।

धनिष्ठा किन अंशों में फैला है?

293°20′–306°40′ निरयण — अर्थात् 23°20′ मकर से 6°40′ कुंभ तक, मकर और कुंभ में।

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