हस्त नक्षत्र
27 में से #13 · 160°00′–173°20′ निरयण · कन्या में
विशेषताएँ
| स्वामी ग्रह (विंशोत्तरी स्वामी) | चंद्र |
|---|---|
| देवता | सविता |
| प्रतीक | हाथ / हथेली |
| गण (स्वभाव) | देव (दिव्य) गण का स्वभाव — परिष्कृत, परोपकारी और सिद्धांतनिष्ठ |
| नाड़ी (प्रकृति) | वात (वायव्य) प्रकृति — तीव्र, गतिशील और सृजनशील |
| योनि (सहज-प्रवृत्ति) | महिष — सहनशील और कर्मठ |
| स्वभाव (मुहूर्त) | क्षिप्र — शीघ्र कार्यों (व्यापार, विद्या, आदान-प्रदान) के लिए उपयुक्त |
चार पद
| पद | विस्तार (निरयण) | राशि |
|---|---|---|
| 1 | 160°00′ – 163°20′ | कन्या (Kanya) |
| 2 | 163°20′ – 166°40′ | कन्या (Kanya) |
| 3 | 166°40′ – 170°00′ | कन्या (Kanya) |
| 4 | 170°00′ – 173°20′ | कन्या (Kanya) |
प्रत्येक पद 3°20′ का है — 13°20′ चाप का नवांश-तुल्य चौथाई भाग।
हस्त का विवेचन
हस्त — अधिष्ठाता देव सविता, प्रतीक "हाथ / हथेली", स्वामी चंद्र। इसमें देव (दिव्य) गण का स्वभाव — परिष्कृत, परोपकारी और सिद्धांतनिष्ठ है, साथ ही वात (वायव्य) प्रकृति — तीव्र, गतिशील और सृजनशील; सहनशील और कर्मठ सहज-प्रवृत्ति (महिष योनि)। चंद्र का स्वामित्व मन, भावनाएँ, माता, पोषण, सार्वजनिक जीवन और आंतरिक संतोष प्रदान करता है। यहाँ की ऊर्जाएँ शीघ्र कार्यों (व्यापार, विद्या, आदान-प्रदान) के अनुकूल हैं।
तथ्य-विशेषताओं (देवता / प्रतीक / स्वामी / गण / नाड़ी / योनि / स्वभाव) से रचित — वही उद्धृत विवेचना जो कुंडली डैशबोर्ड दिखाता है; केवल सामान्य प्रवृत्तियाँ, कभी घटनाएँ या परिणाम नहीं।
आपके प्रश्नों के उत्तर
हस्त नक्षत्र का स्वामी कौन सा ग्रह है?
चंद्र — हस्त का विंशोत्तरी दशा स्वामी।
हस्त के देवता कौन हैं?
सविता; इसका प्रतीक हाथ / हथेली है।
हस्त किन अंशों में फैला है?
160°00′–173°20′ निरयण — अर्थात् 10°00′ कन्या से 23°20′ कन्या तक, कन्या में।
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