कृत्तिका नक्षत्र

27 में से #3 · 26°40′–40°00′ निरयण · मेष & वृषभ में

विशेषताएँ

स्वामी ग्रह (विंशोत्तरी स्वामी) सूर्य
देवता अग्नि
प्रतीक उस्तरा / ज्वाला
गण (स्वभाव) राक्षस (उग्र) गण का स्वभाव — तीव्र, स्वेच्छाचारी और अपरंपरागत
नाड़ी (प्रकृति) कफ (पार्थिव) प्रकृति — स्थिर, धैर्यवान और पोषक
योनि (सहज-प्रवृत्ति) मेष — सौम्य और अनुकूलनशील
स्वभाव (मुहूर्त) मिश्र — मिश्रित और दैनिक कार्यों के लिए उपयुक्त

चार पद

पदविस्तार (निरयण)राशि
1 26°40′ – 30°00′ मेष (Mesha)
2 30°00′ – 33°20′ वृषभ (Vrishabha)
3 33°20′ – 36°40′ वृषभ (Vrishabha)
4 36°40′ – 40°00′ वृषभ (Vrishabha)

प्रत्येक पद 3°20′ का है — 13°20′ चाप का नवांश-तुल्य चौथाई भाग।

कृत्तिका का विवेचन

कृत्तिका — अधिष्ठाता देव अग्नि, प्रतीक "उस्तरा / ज्वाला", स्वामी सूर्य। इसमें राक्षस (उग्र) गण का स्वभाव — तीव्र, स्वेच्छाचारी और अपरंपरागत है, साथ ही कफ (पार्थिव) प्रकृति — स्थिर, धैर्यवान और पोषक; सौम्य और अनुकूलनशील सहज-प्रवृत्ति (मेष योनि)। सूर्य का स्वामित्व आत्मा, प्राणशक्ति, पिता, अधिकार, आत्मविश्वास और नेतृत्व प्रदान करता है। यहाँ की ऊर्जाएँ मिश्रित और दैनिक कार्यों के अनुकूल हैं।

तथ्य-विशेषताओं (देवता / प्रतीक / स्वामी / गण / नाड़ी / योनि / स्वभाव) से रचित — वही उद्धृत विवेचना जो कुंडली डैशबोर्ड दिखाता है; केवल सामान्य प्रवृत्तियाँ, कभी घटनाएँ या परिणाम नहीं।

आपके प्रश्नों के उत्तर

कृत्तिका नक्षत्र का स्वामी कौन सा ग्रह है?

सूर्य — कृत्तिका का विंशोत्तरी दशा स्वामी।

कृत्तिका के देवता कौन हैं?

अग्नि; इसका प्रतीक उस्तरा / ज्वाला है।

कृत्तिका किन अंशों में फैला है?

26°40′–40°00′ निरयण — अर्थात् 26°40′ मेष से 10°00′ वृषभ तक, मेष और वृषभ में।

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