मघा नक्षत्र
27 में से #10 · 120°00′–133°20′ निरयण · सिंह में
विशेषताएँ
| स्वामी ग्रह (विंशोत्तरी स्वामी) | केतु |
|---|---|
| देवता | पितर |
| प्रतीक | सिंहासन |
| गण (स्वभाव) | राक्षस (उग्र) गण का स्वभाव — तीव्र, स्वेच्छाचारी और अपरंपरागत |
| नाड़ी (प्रकृति) | कफ (पार्थिव) प्रकृति — स्थिर, धैर्यवान और पोषक |
| योनि (सहज-प्रवृत्ति) | मूषक — साधन-संपन्न और परिश्रमी |
| स्वभाव (मुहूर्त) | उग्र — उग्र कार्यों (संघर्ष, निर्णायक कर्म) के लिए उपयुक्त |
चार पद
| पद | विस्तार (निरयण) | राशि |
|---|---|---|
| 1 | 120°00′ – 123°20′ | सिंह (Simha) |
| 2 | 123°20′ – 126°40′ | सिंह (Simha) |
| 3 | 126°40′ – 130°00′ | सिंह (Simha) |
| 4 | 130°00′ – 133°20′ | सिंह (Simha) |
प्रत्येक पद 3°20′ का है — 13°20′ चाप का नवांश-तुल्य चौथाई भाग।
मघा का विवेचन
मघा — अधिष्ठाता देव पितर, प्रतीक "सिंहासन", स्वामी केतु। इसमें राक्षस (उग्र) गण का स्वभाव — तीव्र, स्वेच्छाचारी और अपरंपरागत है, साथ ही कफ (पार्थिव) प्रकृति — स्थिर, धैर्यवान और पोषक; साधन-संपन्न और परिश्रमी सहज-प्रवृत्ति (मूषक योनि)। केतु का स्वामित्व वैराग्य, अध्यात्म, पूर्वजन्म के कौशल, मुक्ति और अंतर्ज्ञान प्रदान करता है। यहाँ की ऊर्जाएँ उग्र कार्यों (संघर्ष, निर्णायक कर्म) के अनुकूल हैं।
तथ्य-विशेषताओं (देवता / प्रतीक / स्वामी / गण / नाड़ी / योनि / स्वभाव) से रचित — वही उद्धृत विवेचना जो कुंडली डैशबोर्ड दिखाता है; केवल सामान्य प्रवृत्तियाँ, कभी घटनाएँ या परिणाम नहीं।
आपके प्रश्नों के उत्तर
मघा नक्षत्र का स्वामी कौन सा ग्रह है?
केतु — मघा का विंशोत्तरी दशा स्वामी।
मघा के देवता कौन हैं?
पितर; इसका प्रतीक सिंहासन है।
मघा किन अंशों में फैला है?
120°00′–133°20′ निरयण — अर्थात् 0°00′ सिंह से 13°20′ सिंह तक, सिंह में।
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