मृगशिरा नक्षत्र

27 में से #5 · 53°20′–66°40′ निरयण · वृषभ & मिथुन में

विशेषताएँ

स्वामी ग्रह (विंशोत्तरी स्वामी) मंगल
देवता सोम
प्रतीक हिरण का सिर
गण (स्वभाव) देव (दिव्य) गण का स्वभाव — परिष्कृत, परोपकारी और सिद्धांतनिष्ठ
नाड़ी (प्रकृति) पित्त (आग्नेय) प्रकृति — प्रेरित, तीक्ष्ण और निर्णायक
योनि (सहज-प्रवृत्ति) सर्प — रहस्यप्रिय और भेदक
स्वभाव (मुहूर्त) मृदु — सौम्य कार्यों (कला, मित्रता, सौंदर्य) के लिए उपयुक्त

चार पद

पदविस्तार (निरयण)राशि
1 53°20′ – 56°40′ वृषभ (Vrishabha)
2 56°40′ – 60°00′ वृषभ (Vrishabha)
3 60°00′ – 63°20′ मिथुन (Mithuna)
4 63°20′ – 66°40′ मिथुन (Mithuna)

प्रत्येक पद 3°20′ का है — 13°20′ चाप का नवांश-तुल्य चौथाई भाग।

मृगशिरा का विवेचन

मृगशिरा — अधिष्ठाता देव सोम, प्रतीक "हिरण का सिर", स्वामी मंगल। इसमें देव (दिव्य) गण का स्वभाव — परिष्कृत, परोपकारी और सिद्धांतनिष्ठ है, साथ ही पित्त (आग्नेय) प्रकृति — प्रेरित, तीक्ष्ण और निर्णायक; रहस्यप्रिय और भेदक सहज-प्रवृत्ति (सर्प योनि)। मंगल का स्वामित्व ऊर्जा, साहस, प्रेरणा, भाई-बहन, अनुशासन और प्रतिस्पर्धी बल प्रदान करता है। यहाँ की ऊर्जाएँ सौम्य कार्यों (कला, मित्रता, सौंदर्य) के अनुकूल हैं।

तथ्य-विशेषताओं (देवता / प्रतीक / स्वामी / गण / नाड़ी / योनि / स्वभाव) से रचित — वही उद्धृत विवेचना जो कुंडली डैशबोर्ड दिखाता है; केवल सामान्य प्रवृत्तियाँ, कभी घटनाएँ या परिणाम नहीं।

आपके प्रश्नों के उत्तर

मृगशिरा नक्षत्र का स्वामी कौन सा ग्रह है?

मंगल — मृगशिरा का विंशोत्तरी दशा स्वामी।

मृगशिरा के देवता कौन हैं?

सोम; इसका प्रतीक हिरण का सिर है।

मृगशिरा किन अंशों में फैला है?

53°20′–66°40′ निरयण — अर्थात् 23°20′ वृषभ से 6°40′ मिथुन तक, वृषभ और मिथुन में।

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