पुनर्वसु नक्षत्र

27 में से #7 · 80°00′–93°20′ निरयण · मिथुन & कर्क में

विशेषताएँ

स्वामी ग्रह (विंशोत्तरी स्वामी) गुरु
देवता अदिति
प्रतीक तरकश
गण (स्वभाव) देव (दिव्य) गण का स्वभाव — परिष्कृत, परोपकारी और सिद्धांतनिष्ठ
नाड़ी (प्रकृति) वात (वायव्य) प्रकृति — तीव्र, गतिशील और सृजनशील
योनि (सहज-प्रवृत्ति) मार्जार — स्वतंत्र और सूक्ष्म
स्वभाव (मुहूर्त) चर — गति के कार्यों (यात्रा, परिवर्तन, वाहन) के लिए उपयुक्त

चार पद

पदविस्तार (निरयण)राशि
1 80°00′ – 83°20′ मिथुन (Mithuna)
2 83°20′ – 86°40′ मिथुन (Mithuna)
3 86°40′ – 90°00′ मिथुन (Mithuna)
4 90°00′ – 93°20′ कर्क (Karka)

प्रत्येक पद 3°20′ का है — 13°20′ चाप का नवांश-तुल्य चौथाई भाग।

पुनर्वसु का विवेचन

पुनर्वसु — अधिष्ठाता देव अदिति, प्रतीक "तरकश", स्वामी गुरु। इसमें देव (दिव्य) गण का स्वभाव — परिष्कृत, परोपकारी और सिद्धांतनिष्ठ है, साथ ही वात (वायव्य) प्रकृति — तीव्र, गतिशील और सृजनशील; स्वतंत्र और सूक्ष्म सहज-प्रवृत्ति (मार्जार योनि)। गुरु का स्वामित्व विवेक, विस्तार, सौभाग्य, संतान, नैतिकता और उच्च शिक्षा प्रदान करता है। यहाँ की ऊर्जाएँ गति के कार्यों (यात्रा, परिवर्तन, वाहन) के अनुकूल हैं।

तथ्य-विशेषताओं (देवता / प्रतीक / स्वामी / गण / नाड़ी / योनि / स्वभाव) से रचित — वही उद्धृत विवेचना जो कुंडली डैशबोर्ड दिखाता है; केवल सामान्य प्रवृत्तियाँ, कभी घटनाएँ या परिणाम नहीं।

आपके प्रश्नों के उत्तर

पुनर्वसु नक्षत्र का स्वामी कौन सा ग्रह है?

गुरु — पुनर्वसु का विंशोत्तरी दशा स्वामी।

पुनर्वसु के देवता कौन हैं?

अदिति; इसका प्रतीक तरकश है।

पुनर्वसु किन अंशों में फैला है?

80°00′–93°20′ निरयण — अर्थात् 20°00′ मिथुन से 3°20′ कर्क तक, मिथुन और कर्क में।

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