पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र

27 में से #25 · 320°00′–333°20′ निरयण · कुंभ & मीन में

विशेषताएँ

स्वामी ग्रह (विंशोत्तरी स्वामी) गुरु
देवता अज एकपाद
प्रतीक अर्थी का अगला भाग
गण (स्वभाव) मनुष्य (मानव) गण का स्वभाव — संतुलित, महत्वाकांक्षी और व्यावहारिक
नाड़ी (प्रकृति) वात (वायव्य) प्रकृति — तीव्र, गतिशील और सृजनशील
योनि (सहज-प्रवृत्ति) सिंह — प्रभुत्वशाली और गर्वीला
स्वभाव (मुहूर्त) उग्र — उग्र कार्यों (संघर्ष, निर्णायक कर्म) के लिए उपयुक्त

चार पद

पदविस्तार (निरयण)राशि
1 320°00′ – 323°20′ कुंभ (Kumbha)
2 323°20′ – 326°40′ कुंभ (Kumbha)
3 326°40′ – 330°00′ कुंभ (Kumbha)
4 330°00′ – 333°20′ मीन (Meena)

प्रत्येक पद 3°20′ का है — 13°20′ चाप का नवांश-तुल्य चौथाई भाग।

पूर्वाभाद्रपद का विवेचन

पूर्वाभाद्रपद — अधिष्ठाता देव अज एकपाद, प्रतीक "अर्थी का अगला भाग", स्वामी गुरु। इसमें मनुष्य (मानव) गण का स्वभाव — संतुलित, महत्वाकांक्षी और व्यावहारिक है, साथ ही वात (वायव्य) प्रकृति — तीव्र, गतिशील और सृजनशील; प्रभुत्वशाली और गर्वीला सहज-प्रवृत्ति (सिंह योनि)। गुरु का स्वामित्व विवेक, विस्तार, सौभाग्य, संतान, नैतिकता और उच्च शिक्षा प्रदान करता है। यहाँ की ऊर्जाएँ उग्र कार्यों (संघर्ष, निर्णायक कर्म) के अनुकूल हैं।

तथ्य-विशेषताओं (देवता / प्रतीक / स्वामी / गण / नाड़ी / योनि / स्वभाव) से रचित — वही उद्धृत विवेचना जो कुंडली डैशबोर्ड दिखाता है; केवल सामान्य प्रवृत्तियाँ, कभी घटनाएँ या परिणाम नहीं।

आपके प्रश्नों के उत्तर

पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र का स्वामी कौन सा ग्रह है?

गुरु — पूर्वाभाद्रपद का विंशोत्तरी दशा स्वामी।

पूर्वाभाद्रपद के देवता कौन हैं?

अज एकपाद; इसका प्रतीक अर्थी का अगला भाग है।

पूर्वाभाद्रपद किन अंशों में फैला है?

320°00′–333°20′ निरयण — अर्थात् 20°00′ कुंभ से 3°20′ मीन तक, कुंभ और मीन में।

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