पुष्य नक्षत्र
27 में से #8 · 93°20′–106°40′ निरयण · कर्क में
विशेषताएँ
| स्वामी ग्रह (विंशोत्तरी स्वामी) | शनि |
|---|---|
| देवता | बृहस्पति |
| प्रतीक | गाय का थन / कमल |
| गण (स्वभाव) | देव (दिव्य) गण का स्वभाव — परिष्कृत, परोपकारी और सिद्धांतनिष्ठ |
| नाड़ी (प्रकृति) | पित्त (आग्नेय) प्रकृति — प्रेरित, तीक्ष्ण और निर्णायक |
| योनि (सहज-प्रवृत्ति) | मेष — सौम्य और अनुकूलनशील |
| स्वभाव (मुहूर्त) | क्षिप्र — शीघ्र कार्यों (व्यापार, विद्या, आदान-प्रदान) के लिए उपयुक्त |
चार पद
| पद | विस्तार (निरयण) | राशि |
|---|---|---|
| 1 | 93°20′ – 96°40′ | कर्क (Karka) |
| 2 | 96°40′ – 100°00′ | कर्क (Karka) |
| 3 | 100°00′ – 103°20′ | कर्क (Karka) |
| 4 | 103°20′ – 106°40′ | कर्क (Karka) |
प्रत्येक पद 3°20′ का है — 13°20′ चाप का नवांश-तुल्य चौथाई भाग।
पुष्य का विवेचन
पुष्य — अधिष्ठाता देव बृहस्पति, प्रतीक "गाय का थन / कमल", स्वामी शनि। इसमें देव (दिव्य) गण का स्वभाव — परिष्कृत, परोपकारी और सिद्धांतनिष्ठ है, साथ ही पित्त (आग्नेय) प्रकृति — प्रेरित, तीक्ष्ण और निर्णायक; सौम्य और अनुकूलनशील सहज-प्रवृत्ति (मेष योनि)। शनि का स्वामित्व अनुशासन, उत्तरदायित्व, दीर्घायु, श्रम, धैर्य और कर्म प्रदान करता है। यहाँ की ऊर्जाएँ शीघ्र कार्यों (व्यापार, विद्या, आदान-प्रदान) के अनुकूल हैं।
तथ्य-विशेषताओं (देवता / प्रतीक / स्वामी / गण / नाड़ी / योनि / स्वभाव) से रचित — वही उद्धृत विवेचना जो कुंडली डैशबोर्ड दिखाता है; केवल सामान्य प्रवृत्तियाँ, कभी घटनाएँ या परिणाम नहीं।
आपके प्रश्नों के उत्तर
पुष्य नक्षत्र का स्वामी कौन सा ग्रह है?
शनि — पुष्य का विंशोत्तरी दशा स्वामी।
पुष्य के देवता कौन हैं?
बृहस्पति; इसका प्रतीक गाय का थन / कमल है।
पुष्य किन अंशों में फैला है?
93°20′–106°40′ निरयण — अर्थात् 3°20′ कर्क से 16°40′ कर्क तक, कर्क में।
क्या पुष्य आपका जन्म नक्षत्र है? अपनी निःशुल्क कुंडली बनाएँ और जन्म के समय चंद्रमा की सटीक स्थिति देखें।
अपनी निःशुल्क कुंडली बनाएँ →लहिरी अयनांश (निरयण) से गणना। पंचांग मान स्थानीय सूर्योदय पर आधारित हैं। हम गणना कैसे करते हैं →