रोहिणी नक्षत्र
27 में से #4 · 40°00′–53°20′ निरयण · वृषभ में
विशेषताएँ
| स्वामी ग्रह (विंशोत्तरी स्वामी) | चंद्र |
|---|---|
| देवता | ब्रह्मा |
| प्रतीक | रथ |
| गण (स्वभाव) | मनुष्य (मानव) गण का स्वभाव — संतुलित, महत्वाकांक्षी और व्यावहारिक |
| नाड़ी (प्रकृति) | कफ (पार्थिव) प्रकृति — स्थिर, धैर्यवान और पोषक |
| योनि (सहज-प्रवृत्ति) | सर्प — रहस्यप्रिय और भेदक |
| स्वभाव (मुहूर्त) | ध्रुव — स्थायी कार्यों (नींव, दीर्घकालिक प्रतिबद्धताओं) के लिए उपयुक्त |
चार पद
| पद | विस्तार (निरयण) | राशि |
|---|---|---|
| 1 | 40°00′ – 43°20′ | वृषभ (Vrishabha) |
| 2 | 43°20′ – 46°40′ | वृषभ (Vrishabha) |
| 3 | 46°40′ – 50°00′ | वृषभ (Vrishabha) |
| 4 | 50°00′ – 53°20′ | वृषभ (Vrishabha) |
प्रत्येक पद 3°20′ का है — 13°20′ चाप का नवांश-तुल्य चौथाई भाग।
रोहिणी का विवेचन
रोहिणी — अधिष्ठाता देव ब्रह्मा, प्रतीक "रथ", स्वामी चंद्र। इसमें मनुष्य (मानव) गण का स्वभाव — संतुलित, महत्वाकांक्षी और व्यावहारिक है, साथ ही कफ (पार्थिव) प्रकृति — स्थिर, धैर्यवान और पोषक; रहस्यप्रिय और भेदक सहज-प्रवृत्ति (सर्प योनि)। चंद्र का स्वामित्व मन, भावनाएँ, माता, पोषण, सार्वजनिक जीवन और आंतरिक संतोष प्रदान करता है। यहाँ की ऊर्जाएँ स्थायी कार्यों (नींव, दीर्घकालिक प्रतिबद्धताओं) के अनुकूल हैं।
तथ्य-विशेषताओं (देवता / प्रतीक / स्वामी / गण / नाड़ी / योनि / स्वभाव) से रचित — वही उद्धृत विवेचना जो कुंडली डैशबोर्ड दिखाता है; केवल सामान्य प्रवृत्तियाँ, कभी घटनाएँ या परिणाम नहीं।
आपके प्रश्नों के उत्तर
रोहिणी नक्षत्र का स्वामी कौन सा ग्रह है?
चंद्र — रोहिणी का विंशोत्तरी दशा स्वामी।
रोहिणी के देवता कौन हैं?
ब्रह्मा; इसका प्रतीक रथ है।
रोहिणी किन अंशों में फैला है?
40°00′–53°20′ निरयण — अर्थात् 10°00′ वृषभ से 23°20′ वृषभ तक, वृषभ में।
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