शतभिषा नक्षत्र
27 में से #24 · 306°40′–320°00′ निरयण · कुंभ में
विशेषताएँ
| स्वामी ग्रह (विंशोत्तरी स्वामी) | राहु |
|---|---|
| देवता | वरुण |
| प्रतीक | रिक्त वृत्त |
| गण (स्वभाव) | राक्षस (उग्र) गण का स्वभाव — तीव्र, स्वेच्छाचारी और अपरंपरागत |
| नाड़ी (प्रकृति) | वात (वायव्य) प्रकृति — तीव्र, गतिशील और सृजनशील |
| योनि (सहज-प्रवृत्ति) | अश्व — ऊर्जावान और गतिशील |
| स्वभाव (मुहूर्त) | चर — गति के कार्यों (यात्रा, परिवर्तन, वाहन) के लिए उपयुक्त |
चार पद
| पद | विस्तार (निरयण) | राशि |
|---|---|---|
| 1 | 306°40′ – 310°00′ | कुंभ (Kumbha) |
| 2 | 310°00′ – 313°20′ | कुंभ (Kumbha) |
| 3 | 313°20′ – 316°40′ | कुंभ (Kumbha) |
| 4 | 316°40′ – 320°00′ | कुंभ (Kumbha) |
प्रत्येक पद 3°20′ का है — 13°20′ चाप का नवांश-तुल्य चौथाई भाग।
शतभिषा का विवेचन
शतभिषा — अधिष्ठाता देव वरुण, प्रतीक "रिक्त वृत्त", स्वामी राहु। इसमें राक्षस (उग्र) गण का स्वभाव — तीव्र, स्वेच्छाचारी और अपरंपरागत है, साथ ही वात (वायव्य) प्रकृति — तीव्र, गतिशील और सृजनशील; ऊर्जावान और गतिशील सहज-प्रवृत्ति (अश्व योनि)। राहु का स्वामित्व महत्वाकांक्षा, गहन आसक्ति (व्यामोह), विदेशी विषय, नवाचार और सांसारिक इच्छा प्रदान करता है। यहाँ की ऊर्जाएँ गति के कार्यों (यात्रा, परिवर्तन, वाहन) के अनुकूल हैं।
तथ्य-विशेषताओं (देवता / प्रतीक / स्वामी / गण / नाड़ी / योनि / स्वभाव) से रचित — वही उद्धृत विवेचना जो कुंडली डैशबोर्ड दिखाता है; केवल सामान्य प्रवृत्तियाँ, कभी घटनाएँ या परिणाम नहीं।
आपके प्रश्नों के उत्तर
शतभिषा नक्षत्र का स्वामी कौन सा ग्रह है?
राहु — शतभिषा का विंशोत्तरी दशा स्वामी।
शतभिषा के देवता कौन हैं?
वरुण; इसका प्रतीक रिक्त वृत्त है।
शतभिषा किन अंशों में फैला है?
306°40′–320°00′ निरयण — अर्थात् 6°40′ कुंभ से 20°00′ कुंभ तक, कुंभ में।
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