श्रवण नक्षत्र

27 में से #22 · 280°00′–293°20′ निरयण · मकर में

विशेषताएँ

स्वामी ग्रह (विंशोत्तरी स्वामी) चंद्र
देवता विष्णु
प्रतीक तीन पदचिह्न
गण (स्वभाव) देव (दिव्य) गण का स्वभाव — परिष्कृत, परोपकारी और सिद्धांतनिष्ठ
नाड़ी (प्रकृति) कफ (पार्थिव) प्रकृति — स्थिर, धैर्यवान और पोषक
योनि (सहज-प्रवृत्ति) वानर — चतुर और चंचल
स्वभाव (मुहूर्त) चर — गति के कार्यों (यात्रा, परिवर्तन, वाहन) के लिए उपयुक्त

चार पद

पदविस्तार (निरयण)राशि
1 280°00′ – 283°20′ मकर (Makara)
2 283°20′ – 286°40′ मकर (Makara)
3 286°40′ – 290°00′ मकर (Makara)
4 290°00′ – 293°20′ मकर (Makara)

प्रत्येक पद 3°20′ का है — 13°20′ चाप का नवांश-तुल्य चौथाई भाग।

श्रवण का विवेचन

श्रवण — अधिष्ठाता देव विष्णु, प्रतीक "तीन पदचिह्न", स्वामी चंद्र। इसमें देव (दिव्य) गण का स्वभाव — परिष्कृत, परोपकारी और सिद्धांतनिष्ठ है, साथ ही कफ (पार्थिव) प्रकृति — स्थिर, धैर्यवान और पोषक; चतुर और चंचल सहज-प्रवृत्ति (वानर योनि)। चंद्र का स्वामित्व मन, भावनाएँ, माता, पोषण, सार्वजनिक जीवन और आंतरिक संतोष प्रदान करता है। यहाँ की ऊर्जाएँ गति के कार्यों (यात्रा, परिवर्तन, वाहन) के अनुकूल हैं।

तथ्य-विशेषताओं (देवता / प्रतीक / स्वामी / गण / नाड़ी / योनि / स्वभाव) से रचित — वही उद्धृत विवेचना जो कुंडली डैशबोर्ड दिखाता है; केवल सामान्य प्रवृत्तियाँ, कभी घटनाएँ या परिणाम नहीं।

आपके प्रश्नों के उत्तर

श्रवण नक्षत्र का स्वामी कौन सा ग्रह है?

चंद्र — श्रवण का विंशोत्तरी दशा स्वामी।

श्रवण के देवता कौन हैं?

विष्णु; इसका प्रतीक तीन पदचिह्न है।

श्रवण किन अंशों में फैला है?

280°00′–293°20′ निरयण — अर्थात् 10°00′ मकर से 23°20′ मकर तक, मकर में।

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