स्वाति नक्षत्र

27 में से #15 · 186°40′–200°00′ निरयण · तुला में

विशेषताएँ

स्वामी ग्रह (विंशोत्तरी स्वामी) राहु
देवता वायु
प्रतीक मूँगा / अंकुर
गण (स्वभाव) देव (दिव्य) गण का स्वभाव — परिष्कृत, परोपकारी और सिद्धांतनिष्ठ
नाड़ी (प्रकृति) कफ (पार्थिव) प्रकृति — स्थिर, धैर्यवान और पोषक
योनि (सहज-प्रवृत्ति) महिष — सहनशील और कर्मठ
स्वभाव (मुहूर्त) चर — गति के कार्यों (यात्रा, परिवर्तन, वाहन) के लिए उपयुक्त

चार पद

पदविस्तार (निरयण)राशि
1 186°40′ – 190°00′ तुला (Tula)
2 190°00′ – 193°20′ तुला (Tula)
3 193°20′ – 196°40′ तुला (Tula)
4 196°40′ – 200°00′ तुला (Tula)

प्रत्येक पद 3°20′ का है — 13°20′ चाप का नवांश-तुल्य चौथाई भाग।

स्वाति का विवेचन

स्वाति — अधिष्ठाता देव वायु, प्रतीक "मूँगा / अंकुर", स्वामी राहु। इसमें देव (दिव्य) गण का स्वभाव — परिष्कृत, परोपकारी और सिद्धांतनिष्ठ है, साथ ही कफ (पार्थिव) प्रकृति — स्थिर, धैर्यवान और पोषक; सहनशील और कर्मठ सहज-प्रवृत्ति (महिष योनि)। राहु का स्वामित्व महत्वाकांक्षा, गहन आसक्ति (व्यामोह), विदेशी विषय, नवाचार और सांसारिक इच्छा प्रदान करता है। यहाँ की ऊर्जाएँ गति के कार्यों (यात्रा, परिवर्तन, वाहन) के अनुकूल हैं।

तथ्य-विशेषताओं (देवता / प्रतीक / स्वामी / गण / नाड़ी / योनि / स्वभाव) से रचित — वही उद्धृत विवेचना जो कुंडली डैशबोर्ड दिखाता है; केवल सामान्य प्रवृत्तियाँ, कभी घटनाएँ या परिणाम नहीं।

आपके प्रश्नों के उत्तर

स्वाति नक्षत्र का स्वामी कौन सा ग्रह है?

राहु — स्वाति का विंशोत्तरी दशा स्वामी।

स्वाति के देवता कौन हैं?

वायु; इसका प्रतीक मूँगा / अंकुर है।

स्वाति किन अंशों में फैला है?

186°40′–200°00′ निरयण — अर्थात् 6°40′ तुला से 20°00′ तुला तक, तुला में।

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