उत्तराभाद्रपद नक्षत्र
27 में से #26 · 333°20′–346°40′ निरयण · मीन में
विशेषताएँ
| स्वामी ग्रह (विंशोत्तरी स्वामी) | शनि |
|---|---|
| देवता | अहिर्बुध्न्य |
| प्रतीक | अर्थी का पिछला भाग |
| गण (स्वभाव) | मनुष्य (मानव) गण का स्वभाव — संतुलित, महत्वाकांक्षी और व्यावहारिक |
| नाड़ी (प्रकृति) | पित्त (आग्नेय) प्रकृति — प्रेरित, तीक्ष्ण और निर्णायक |
| योनि (सहज-प्रवृत्ति) | गौ — धैर्यवान और उदार |
| स्वभाव (मुहूर्त) | ध्रुव — स्थायी कार्यों (नींव, दीर्घकालिक प्रतिबद्धताओं) के लिए उपयुक्त |
चार पद
| पद | विस्तार (निरयण) | राशि |
|---|---|---|
| 1 | 333°20′ – 336°40′ | मीन (Meena) |
| 2 | 336°40′ – 340°00′ | मीन (Meena) |
| 3 | 340°00′ – 343°20′ | मीन (Meena) |
| 4 | 343°20′ – 346°40′ | मीन (Meena) |
प्रत्येक पद 3°20′ का है — 13°20′ चाप का नवांश-तुल्य चौथाई भाग।
उत्तराभाद्रपद का विवेचन
उत्तराभाद्रपद — अधिष्ठाता देव अहिर्बुध्न्य, प्रतीक "अर्थी का पिछला भाग", स्वामी शनि। इसमें मनुष्य (मानव) गण का स्वभाव — संतुलित, महत्वाकांक्षी और व्यावहारिक है, साथ ही पित्त (आग्नेय) प्रकृति — प्रेरित, तीक्ष्ण और निर्णायक; धैर्यवान और उदार सहज-प्रवृत्ति (गौ योनि)। शनि का स्वामित्व अनुशासन, उत्तरदायित्व, दीर्घायु, श्रम, धैर्य और कर्म प्रदान करता है। यहाँ की ऊर्जाएँ स्थायी कार्यों (नींव, दीर्घकालिक प्रतिबद्धताओं) के अनुकूल हैं।
तथ्य-विशेषताओं (देवता / प्रतीक / स्वामी / गण / नाड़ी / योनि / स्वभाव) से रचित — वही उद्धृत विवेचना जो कुंडली डैशबोर्ड दिखाता है; केवल सामान्य प्रवृत्तियाँ, कभी घटनाएँ या परिणाम नहीं।
आपके प्रश्नों के उत्तर
उत्तराभाद्रपद नक्षत्र का स्वामी कौन सा ग्रह है?
शनि — उत्तराभाद्रपद का विंशोत्तरी दशा स्वामी।
उत्तराभाद्रपद के देवता कौन हैं?
अहिर्बुध्न्य; इसका प्रतीक अर्थी का पिछला भाग है।
उत्तराभाद्रपद किन अंशों में फैला है?
333°20′–346°40′ निरयण — अर्थात् 3°20′ मीन से 16°40′ मीन तक, मीन में।
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