उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र

27 में से #12 · 146°40′–160°00′ निरयण · सिंह & कन्या में

विशेषताएँ

स्वामी ग्रह (विंशोत्तरी स्वामी) सूर्य
देवता अर्यमा
प्रतीक शय्या का पिछला भाग
गण (स्वभाव) मनुष्य (मानव) गण का स्वभाव — संतुलित, महत्वाकांक्षी और व्यावहारिक
नाड़ी (प्रकृति) वात (वायव्य) प्रकृति — तीव्र, गतिशील और सृजनशील
योनि (सहज-प्रवृत्ति) गौ — धैर्यवान और उदार
स्वभाव (मुहूर्त) ध्रुव — स्थायी कार्यों (नींव, दीर्घकालिक प्रतिबद्धताओं) के लिए उपयुक्त

चार पद

पदविस्तार (निरयण)राशि
1 146°40′ – 150°00′ सिंह (Simha)
2 150°00′ – 153°20′ कन्या (Kanya)
3 153°20′ – 156°40′ कन्या (Kanya)
4 156°40′ – 160°00′ कन्या (Kanya)

प्रत्येक पद 3°20′ का है — 13°20′ चाप का नवांश-तुल्य चौथाई भाग।

उत्तरा फाल्गुनी का विवेचन

उत्तरा फाल्गुनी — अधिष्ठाता देव अर्यमा, प्रतीक "शय्या का पिछला भाग", स्वामी सूर्य। इसमें मनुष्य (मानव) गण का स्वभाव — संतुलित, महत्वाकांक्षी और व्यावहारिक है, साथ ही वात (वायव्य) प्रकृति — तीव्र, गतिशील और सृजनशील; धैर्यवान और उदार सहज-प्रवृत्ति (गौ योनि)। सूर्य का स्वामित्व आत्मा, प्राणशक्ति, पिता, अधिकार, आत्मविश्वास और नेतृत्व प्रदान करता है। यहाँ की ऊर्जाएँ स्थायी कार्यों (नींव, दीर्घकालिक प्रतिबद्धताओं) के अनुकूल हैं।

तथ्य-विशेषताओं (देवता / प्रतीक / स्वामी / गण / नाड़ी / योनि / स्वभाव) से रचित — वही उद्धृत विवेचना जो कुंडली डैशबोर्ड दिखाता है; केवल सामान्य प्रवृत्तियाँ, कभी घटनाएँ या परिणाम नहीं।

आपके प्रश्नों के उत्तर

उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र का स्वामी कौन सा ग्रह है?

सूर्य — उत्तरा फाल्गुनी का विंशोत्तरी दशा स्वामी।

उत्तरा फाल्गुनी के देवता कौन हैं?

अर्यमा; इसका प्रतीक शय्या का पिछला भाग है।

उत्तरा फाल्गुनी किन अंशों में फैला है?

146°40′–160°00′ निरयण — अर्थात् 26°40′ सिंह से 10°00′ कन्या तक, सिंह और कन्या में।

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