अमृत सिद्धि योग 2026
2026 में नई दिल्ली पर 25 अवधियाँ, सूर्योदय-से-सूर्योदय गणना।
| दिन | वार | अवधि | नक्षत्र | तिथि |
|---|---|---|---|---|
| बुधवार, 14 जनवरी 2026 | बुधवार | 07:15–03:03 | अनुराधा | एकादशी |
| बुधवार, 11 फ़रवरी 2026 | बुधवार | 07:02–10:52 | अनुराधा | नवमी |
| शुक्रवार, 20 फ़रवरी 2026 | शुक्रवार | 20:07–06:54 | रेवती | तृतीया |
| शुक्रवार, 20 मार्च 2026 | शुक्रवार | 06:25–02:27 | रेवती | द्वितीया |
| शुक्रवार, 17 अप्रैल 2026 | शुक्रवार | 05:53–12:02 | रेवती | पूर्णिमा/अमावस्या |
| सोमवार, 20 अप्रैल 2026 | सोमवार | 02:08–05:49 | मृगशिरा | तृतीया |
| गुरुवार, 23 अप्रैल 2026 | गुरुवार | 20:57–05:46 | पुष्य | सप्तमी |
| सोमवार, 18 मई 2026 | सोमवार | 11:32–05:28 | मृगशिरा | द्वितीया |
| गुरुवार, 21 मई 2026 | गुरुवार | 05:27–02:49 | पुष्य | पंचमी |
| शनिवार, 13 जून 2026 | शनिवार | 01:17–05:22 | रोहिणी | त्रयोदशी |
| सोमवार, 15 जून 2026 | सोमवार | 05:22–19:08 | मृगशिरा | पूर्णिमा/अमावस्या |
| गुरुवार, 18 जून 2026 | गुरुवार | 05:23–11:32 | पुष्य | चतुर्थी |
| शनिवार, 11 जुलाई 2026 | शनिवार | 11:03–05:31 | रोहिणी | द्वादशी |
| सोमवार, 13 जुलाई 2026 | सोमवार | 05:32–05:41 | मृगशिरा | चतुर्दशी |
| रविवार, 19 जुलाई 2026 | रविवार | 18:12–05:35 | हस्त | षष्ठी |
| मंगलवार, 4 अगस्त 2026 | मंगलवार | 21:54–05:44 | अश्विनी | षष्ठी |
| शनिवार, 8 अगस्त 2026 | शनिवार | 05:46–16:51 | रोहिणी | दशमी |
| रविवार, 16 अगस्त 2026 | रविवार | 05:50–03:50 | हस्त | चतुर्थी |
| मंगलवार, 1 सितंबर 2026 | मंगलवार | 05:59–02:42 | अश्विनी | चतुर्थी |
| रविवार, 13 सितंबर 2026 | रविवार | 06:05–13:07 | हस्त | द्वितीया |
| बुधवार, 16 सितंबर 2026 | बुधवार | 17:22–06:06 | अनुराधा | पंचमी |
| मंगलवार, 29 सितंबर 2026 | मंगलवार | 06:12–09:03 | अश्विनी | तृतीया |
| बुधवार, 14 अक्टूबर 2026 | बुधवार | 06:21–04:03 | अनुराधा | चतुर्थी |
| बुधवार, 11 नवंबर 2026 | बुधवार | 06:40–11:38 | अनुराधा | द्वितीया |
| शुक्रवार, 18 दिसंबर 2026 | शुक्रवार | 16:10–07:08 | रेवती | नवमी |
आपके प्रश्नों के उत्तर
अमृत सिद्धि योग क्या है?
अमृत सिद्धि योग तब बनता है जब कोई विशिष्ट नक्षत्र अपने युग्म-वार पर पड़े (जैसे गुरुवार को पुष्य)।
ये तिथियाँ कैसे गणित होती हैं?
आवश्यक नक्षत्र का आवश्यक वार (सूर्योदय-से-सूर्योदय) पर संदर्भ स्थान पर उपस्थित होना ज्ञात करके, एफ़ेमेरिस (लाहिड़ी) से। नियम एक उद्धृत शास्त्रीय परंपरा है।
क्या सभी पंचांग इन तिथियों पर सहमत हैं?
रवि पुष्य, गुरु पुष्य व अमृत सिद्धि पर प्राधिकरण सहमत हैं; सर्वार्थ सिद्धि के कुछ वार-नक्षत्र कक्षों पर भिन्नता है। यह पृष्ठ शास्त्रीय पाठ (जिसे द्रिक पंचांग गणित करता है) पिन करता है और उसकी 2026 तिथियाँ संदर्भ स्थान हेतु द्रिक पंचांग से सत्यापित करता है। भिन्नताएँ प्रकट की जाती हैं, कोई फल नहीं।
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अपनी निःशुल्क कुंडली बनाएँ →अवधियाँ नई दिल्ली पर वार अनुसार (सूर्योदय-से-सूर्योदय) एफ़ेमेरिस (लाहिड़ी) से गणित हैं; सूर्योदय-पूर्व की अवधि उसके शासक वार वाली पिछली तिथि के अंतर्गत सूचीबद्ध होती है। योग-नियम एक उद्धृत शास्त्रीय परंपरा है, पंचांग प्राधिकरणों में क्रॉस-सत्यापित, भिन्नताएँ प्रकट व 2026 तिथियाँ द्रिक पंचांग से सत्यापित। कोई फल नहीं।
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