ग्रहण — भुवनेश्वर 2026
2026 के प्रत्येक सूर्य व चंद्र ग्रहण की भुवनेश्वर से देखी गई स्थानीय स्थिति: स्थानीय समय में स्पर्श-समय, प्रत्येक संपर्क पर ग्रहणग्रस्त पिंड की ऊँचाई, ग्रसन और सुतक-काल। क्षण एक सटीक खगोलीय खोज (निरयण, लाहिड़ी) से।
भुवनेश्वर से दृश्य = प्रच्छाया (आंशिक या पूर्ण) चरण के कम-से-कम कुछ भाग के दौरान ग्रहणग्रस्त पिंड आपके क्षितिज से ऊपर हो — यही नग्न-नेत्र ग्रहण है। ऊँचाई पिंड के केंद्र हेतु आभासी (अपवर्तन-सुधारित) है; केंद्र की 0° ऊँचाई पर भी बिंब का ऊपरी किनारा लगभग 0.8° ऊपर रहता है, अतः क्षितिज को छूता ग्रहण भी वास्तव में दृश्य होता है।
वलयाकार सूर्य ग्रहण — 17 फ़र॰, 17:41
भुवनेश्वर से अदृश्य — ग्रहणग्रस्त पिंड सम्पूर्ण प्रच्छाया चरण में क्षितिज के नीचे रहता है।निरयण स्थिति: 4°37′ कुंभ · धनिष्ठा
पूर्ण चंद्र ग्रहण — 3 मार्च, 17:03
भुवनेश्वर से दृश्यनिरयण स्थिति: 18°38′ सिंह · पूर्वा फाल्गुनी · चरम पर ग्रसन: 100%
ग्रहणग्रस्त पिंड ग्रहण के दौरान क्षितिज पार करता है (ग्रस्तोदय / ग्रस्तास्त) — यह ग्रहण-मध्य में उदय या अस्त होता है, अतः भुवनेश्वर से केवल क्षितिज के ऊपर वाला भाग दृश्य है।
| चरण | स्थानीय समय | ऊँचाई | चरण प्रकार |
|---|---|---|---|
| उपच्छाया आरंभ | 3 मार्च, 14:14 | -46.1° | उपच्छाया |
| आंशिक आरंभ | 3 मार्च, 15:19 | -33.2° | प्रच्छाया |
| पूर्णता आरंभ | 3 मार्च, 16:33 | -17.3° | प्रच्छाया |
| चरम | 3 मार्च, 17:03 | -10.7° | प्रच्छाया |
| पूर्णता समाप्त | 3 मार्च, 17:33 | -4.1° | प्रच्छाया |
| आंशिक समाप्त | 3 मार्च, 18:47 | +12.1° | प्रच्छाया |
| उपच्छाया समाप्त | 3 मार्च, 19:53 | +27.0° | उपच्छाया |
स्मार्त मत (CONVENTION): सुतक स्पर्श — प्रथम प्रच्छाया-संपर्क — से 4 प्रहर (~12 घंटे, सूर्यग्रहण) या 3 प्रहर (~9 घंटे, चंद्रग्रहण) पूर्व आरंभ होकर मोक्ष (अंतिम प्रच्छाया-संपर्क) पर समाप्त; केवल वहीं जहाँ ग्रहण स्थानीय रूप से दृश्य हो। प्रहर को नाममात्र ~3 घंटे माना गया है। वैष्णव व क्षेत्रीय मत वेध और अपवादों में भिन्न हैं, कुछ तालिकाएँ नियत घंटे से गणना करती हैं, तथा घटित-सुतक की छूट (बालक, रोगी, वृद्ध) भी है। हम स्मार्त स्पर्श-आधारित नियम को स्थिर मानते हैं और केवल आरंभ/अंत क्षण दर्शाते हैं।
सुतक परंपरा: धर्मसिन्धु / निर्णयसिन्धु — स्रोत व पद्धति
पूर्ण सूर्य ग्रहण — 12 अग॰, 23:15
भुवनेश्वर से अदृश्य — ग्रहणग्रस्त पिंड सम्पूर्ण प्रच्छाया चरण में क्षितिज के नीचे रहता है।निरयण स्थिति: 25°48′ कर्क · आश्लेषा
आंशिक चंद्र ग्रहण — 28 अग॰, 09:42
भुवनेश्वर से अदृश्य — ग्रहणग्रस्त पिंड सम्पूर्ण प्रच्छाया चरण में क्षितिज के नीचे रहता है।निरयण स्थिति: 10°37′ कुंभ · शतभिषा
| चरण | स्थानीय समय | ऊँचाई | चरण प्रकार |
|---|---|---|---|
| उपच्छाया आरंभ | 28 अग॰, 06:53 | -20.4° | उपच्छाया |
| आंशिक आरंभ | 28 अग॰, 08:03 | -36.2° | प्रच्छाया |
| चरम | 28 अग॰, 09:42 | -58.3° | प्रच्छाया |
| आंशिक समाप्त | 28 अग॰, 11:22 | -76.9° | प्रच्छाया |
| उपच्छाया समाप्त | 28 अग॰, 12:32 | -75.0° | उपच्छाया |
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आपके प्रश्नों के उत्तर
2026 में भुवनेश्वर से कितने ग्रहण दृश्य हैं?
2026 में चरम को प्राप्त 4 ग्रहणों में से 1 भुवनेश्वर से देखे जा सकते हैं — शेष अपने प्रच्छाया चरण में क्षितिज के नीचे रहते हैं।
2026 में भुवनेश्वर से पहला दृश्य ग्रहण कौन-सा है?
पूर्ण चंद्र ग्रहण — 3 मार्च, 17:03, निरयण सिंह (पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र) में।
सुतक (ग्रहण) काल क्या है?
सुतक दृश्य ग्रहण के आसपास की स्मृति-अशौच अवधि है। हमारे द्वारा उद्धृत स्मार्त मत के अनुसार यह प्रथम प्रच्छाया-संपर्क से ~12 घंटे (सूर्य) या ~9 घंटे (चंद्र) पूर्व आरंभ होकर अंतिम पर समाप्त होती है, और केवल वहीं लागू जहाँ ग्रहण दृश्य हो।
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