अनुराधा नक्षत्र

27 में से #17 · 213°20′–226°40′ निरयण · वृश्चिक में

विशेषताएँ

स्वामी ग्रह (विंशोत्तरी स्वामी) शनि
देवता मित्र
प्रतीक कमल
गण (स्वभाव) देव (दिव्य) गण का स्वभाव — परिष्कृत, परोपकारी और सिद्धांतनिष्ठ
नाड़ी (प्रकृति) पित्त (आग्नेय) प्रकृति — प्रेरित, तीक्ष्ण और निर्णायक
योनि (सहज-प्रवृत्ति) मृग — सौम्य और फुर्तीला
स्वभाव (मुहूर्त) मृदु — सौम्य कार्यों (कला, मित्रता, सौंदर्य) के लिए उपयुक्त

चार पद

पदविस्तार (निरयण)राशि
1 213°20′ – 216°40′ वृश्चिक (Vrishchika)
2 216°40′ – 220°00′ वृश्चिक (Vrishchika)
3 220°00′ – 223°20′ वृश्चिक (Vrishchika)
4 223°20′ – 226°40′ वृश्चिक (Vrishchika)

प्रत्येक पद 3°20′ का है — 13°20′ चाप का नवांश-तुल्य चौथाई भाग।

अनुराधा का विवेचन

अनुराधा — अधिष्ठाता देव मित्र, प्रतीक "कमल", स्वामी शनि। इसमें देव (दिव्य) गण का स्वभाव — परिष्कृत, परोपकारी और सिद्धांतनिष्ठ है, साथ ही पित्त (आग्नेय) प्रकृति — प्रेरित, तीक्ष्ण और निर्णायक; सौम्य और फुर्तीला सहज-प्रवृत्ति (मृग योनि)। शनि का स्वामित्व अनुशासन, उत्तरदायित्व, दीर्घायु, श्रम, धैर्य और कर्म प्रदान करता है। यहाँ की ऊर्जाएँ सौम्य कार्यों (कला, मित्रता, सौंदर्य) के अनुकूल हैं।

तथ्य-विशेषताओं (देवता / प्रतीक / स्वामी / गण / नाड़ी / योनि / स्वभाव) से रचित — वही उद्धृत विवेचना जो कुंडली डैशबोर्ड दिखाता है; केवल सामान्य प्रवृत्तियाँ, कभी घटनाएँ या परिणाम नहीं।

आपके प्रश्नों के उत्तर

अनुराधा नक्षत्र का स्वामी कौन सा ग्रह है?

शनि — अनुराधा का विंशोत्तरी दशा स्वामी।

अनुराधा के देवता कौन हैं?

मित्र; इसका प्रतीक कमल है।

अनुराधा किन अंशों में फैला है?

213°20′–226°40′ निरयण — अर्थात् 3°20′ वृश्चिक से 16°40′ वृश्चिक तक, वृश्चिक में।

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