ज्येष्ठा नक्षत्र
27 में से #18 · 226°40′–240°00′ निरयण · वृश्चिक में
विशेषताएँ
| स्वामी ग्रह (विंशोत्तरी स्वामी) | बुध |
|---|---|
| देवता | इंद्र |
| प्रतीक | कुंडल / छत्र |
| गण (स्वभाव) | राक्षस (उग्र) गण का स्वभाव — तीव्र, स्वेच्छाचारी और अपरंपरागत |
| नाड़ी (प्रकृति) | वात (वायव्य) प्रकृति — तीव्र, गतिशील और सृजनशील |
| योनि (सहज-प्रवृत्ति) | मृग — सौम्य और फुर्तीला |
| स्वभाव (मुहूर्त) | तीक्ष्ण — तीक्ष्ण कार्यों (अनुशासन, एकाग्रता, विच्छेद) के लिए उपयुक्त |
चार पद
| पद | विस्तार (निरयण) | राशि |
|---|---|---|
| 1 | 226°40′ – 230°00′ | वृश्चिक (Vrishchika) |
| 2 | 230°00′ – 233°20′ | वृश्चिक (Vrishchika) |
| 3 | 233°20′ – 236°40′ | वृश्चिक (Vrishchika) |
| 4 | 236°40′ – 240°00′ | वृश्चिक (Vrishchika) |
प्रत्येक पद 3°20′ का है — 13°20′ चाप का नवांश-तुल्य चौथाई भाग।
ज्येष्ठा का विवेचन
ज्येष्ठा — अधिष्ठाता देव इंद्र, प्रतीक "कुंडल / छत्र", स्वामी बुध। इसमें राक्षस (उग्र) गण का स्वभाव — तीव्र, स्वेच्छाचारी और अपरंपरागत है, साथ ही वात (वायव्य) प्रकृति — तीव्र, गतिशील और सृजनशील; सौम्य और फुर्तीला सहज-प्रवृत्ति (मृग योनि)। बुध का स्वामित्व बुद्धि, संप्रेषण, व्यापार, विश्लेषण और अनुकूलनशीलता प्रदान करता है। यहाँ की ऊर्जाएँ तीक्ष्ण कार्यों (अनुशासन, एकाग्रता, विच्छेद) के अनुकूल हैं।
तथ्य-विशेषताओं (देवता / प्रतीक / स्वामी / गण / नाड़ी / योनि / स्वभाव) से रचित — वही उद्धृत विवेचना जो कुंडली डैशबोर्ड दिखाता है; केवल सामान्य प्रवृत्तियाँ, कभी घटनाएँ या परिणाम नहीं।
आपके प्रश्नों के उत्तर
ज्येष्ठा नक्षत्र का स्वामी कौन सा ग्रह है?
बुध — ज्येष्ठा का विंशोत्तरी दशा स्वामी।
ज्येष्ठा के देवता कौन हैं?
इंद्र; इसका प्रतीक कुंडल / छत्र है।
ज्येष्ठा किन अंशों में फैला है?
226°40′–240°00′ निरयण — अर्थात् 16°40′ वृश्चिक से 30°00′ वृश्चिक तक, वृश्चिक में।
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