उत्तराषाढ़ा नक्षत्र

27 में से #21 · 266°40′–280°00′ निरयण · धनु & मकर में

विशेषताएँ

स्वामी ग्रह (विंशोत्तरी स्वामी) सूर्य
देवता विश्वेदेव
प्रतीक हाथी का दाँत
गण (स्वभाव) मनुष्य (मानव) गण का स्वभाव — संतुलित, महत्वाकांक्षी और व्यावहारिक
नाड़ी (प्रकृति) कफ (पार्थिव) प्रकृति — स्थिर, धैर्यवान और पोषक
योनि (सहज-प्रवृत्ति) नकुल — सतर्क और रक्षात्मक
स्वभाव (मुहूर्त) ध्रुव — स्थायी कार्यों (नींव, दीर्घकालिक प्रतिबद्धताओं) के लिए उपयुक्त

चार पद

पदविस्तार (निरयण)राशि
1 266°40′ – 270°00′ धनु (Dhanu)
2 270°00′ – 273°20′ मकर (Makara)
3 273°20′ – 276°40′ मकर (Makara)
4 276°40′ – 280°00′ मकर (Makara)

प्रत्येक पद 3°20′ का है — 13°20′ चाप का नवांश-तुल्य चौथाई भाग।

उत्तराषाढ़ा का विवेचन

उत्तराषाढ़ा — अधिष्ठाता देव विश्वेदेव, प्रतीक "हाथी का दाँत", स्वामी सूर्य। इसमें मनुष्य (मानव) गण का स्वभाव — संतुलित, महत्वाकांक्षी और व्यावहारिक है, साथ ही कफ (पार्थिव) प्रकृति — स्थिर, धैर्यवान और पोषक; सतर्क और रक्षात्मक सहज-प्रवृत्ति (नकुल योनि)। सूर्य का स्वामित्व आत्मा, प्राणशक्ति, पिता, अधिकार, आत्मविश्वास और नेतृत्व प्रदान करता है। यहाँ की ऊर्जाएँ स्थायी कार्यों (नींव, दीर्घकालिक प्रतिबद्धताओं) के अनुकूल हैं।

तथ्य-विशेषताओं (देवता / प्रतीक / स्वामी / गण / नाड़ी / योनि / स्वभाव) से रचित — वही उद्धृत विवेचना जो कुंडली डैशबोर्ड दिखाता है; केवल सामान्य प्रवृत्तियाँ, कभी घटनाएँ या परिणाम नहीं।

आपके प्रश्नों के उत्तर

उत्तराषाढ़ा नक्षत्र का स्वामी कौन सा ग्रह है?

सूर्य — उत्तराषाढ़ा का विंशोत्तरी दशा स्वामी।

उत्तराषाढ़ा के देवता कौन हैं?

विश्वेदेव; इसका प्रतीक हाथी का दाँत है।

उत्तराषाढ़ा किन अंशों में फैला है?

266°40′–280°00′ निरयण — अर्थात् 26°40′ धनु से 10°00′ मकर तक, धनु और मकर में।

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