विशाखा नक्षत्र

27 में से #16 · 200°00′–213°20′ निरयण · तुला & वृश्चिक में

विशेषताएँ

स्वामी ग्रह (विंशोत्तरी स्वामी) गुरु
देवता इंद्राग्नि
प्रतीक विजय-तोरण
गण (स्वभाव) राक्षस (उग्र) गण का स्वभाव — तीव्र, स्वेच्छाचारी और अपरंपरागत
नाड़ी (प्रकृति) कफ (पार्थिव) प्रकृति — स्थिर, धैर्यवान और पोषक
योनि (सहज-प्रवृत्ति) व्याघ्र — साहसी और क्षेत्र-रक्षक
स्वभाव (मुहूर्त) मिश्र — मिश्रित और दैनिक कार्यों के लिए उपयुक्त

चार पद

पदविस्तार (निरयण)राशि
1 200°00′ – 203°20′ तुला (Tula)
2 203°20′ – 206°40′ तुला (Tula)
3 206°40′ – 210°00′ तुला (Tula)
4 210°00′ – 213°20′ वृश्चिक (Vrishchika)

प्रत्येक पद 3°20′ का है — 13°20′ चाप का नवांश-तुल्य चौथाई भाग।

विशाखा का विवेचन

विशाखा — अधिष्ठाता देव इंद्राग्नि, प्रतीक "विजय-तोरण", स्वामी गुरु। इसमें राक्षस (उग्र) गण का स्वभाव — तीव्र, स्वेच्छाचारी और अपरंपरागत है, साथ ही कफ (पार्थिव) प्रकृति — स्थिर, धैर्यवान और पोषक; साहसी और क्षेत्र-रक्षक सहज-प्रवृत्ति (व्याघ्र योनि)। गुरु का स्वामित्व विवेक, विस्तार, सौभाग्य, संतान, नैतिकता और उच्च शिक्षा प्रदान करता है। यहाँ की ऊर्जाएँ मिश्रित और दैनिक कार्यों के अनुकूल हैं।

तथ्य-विशेषताओं (देवता / प्रतीक / स्वामी / गण / नाड़ी / योनि / स्वभाव) से रचित — वही उद्धृत विवेचना जो कुंडली डैशबोर्ड दिखाता है; केवल सामान्य प्रवृत्तियाँ, कभी घटनाएँ या परिणाम नहीं।

आपके प्रश्नों के उत्तर

विशाखा नक्षत्र का स्वामी कौन सा ग्रह है?

गुरु — विशाखा का विंशोत्तरी दशा स्वामी।

विशाखा के देवता कौन हैं?

इंद्राग्नि; इसका प्रतीक विजय-तोरण है।

विशाखा किन अंशों में फैला है?

200°00′–213°20′ निरयण — अर्थात् 20°00′ तुला से 3°20′ वृश्चिक तक, तुला और वृश्चिक में।

क्या विशाखा आपका जन्म नक्षत्र है? अपनी निःशुल्क कुंडली बनाएँ और जन्म के समय चंद्रमा की सटीक स्थिति देखें।

अपनी निःशुल्क कुंडली बनाएँ →

लहिरी अयनांश (निरयण) से गणना। पंचांग मान स्थानीय सूर्योदय पर आधारित हैं। हम गणना कैसे करते हैं →